Harsha Richharia: हर्षा रिछारिया का धर्म-संन्यास से मोहभंग! ऐसा क्या हुआ कि एक साल में ही कर दिया साध्वी जीवन त्यागने का ऐलान

Harsha Richharia update: प्रयागराज महाकुंभ 2025 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) का 2026 शुरू होते ही धर्म और संन्यास से मोहभंग हो गया.. कभी माया-मोह से मुक्त होकर सनातन का प्रचार करने का दावा करने वाली हर्षा वापस ग्लैमर की गली में जाने को बेताब हैं।

HIGHLIGHTS
  • प्रयागराज महाकुंभ 2025 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया
  • ग्लैमर वाली दुनिया में वापसी का ऐलान
  • कांटों पर चलकर तय करनी होती है तप और साधना की राह

Jabalpur news : महाकुंभ’ पर पवित्र स्नान के बीच कुछ चेहरे ऐसे उभरे जिन्होंने…अपनी पहली ही झलक के साथ, पूरे देश में अपनी पहचान बना ली…जिन्हें आप कुंभक्षेत्र का सेंटर ऑफ अट्रेक्शन भी कह सकते हैं…ऐसा ही एक नाम है, (Harsha Richharia disillusionment religious renunciation) सबसे सुंदर साध्वी के तौर पर चर्चित हुई हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) का…जिन्हें पहले साध्वी को तौर पर देख लोग हैरान हुए…तो अब एक साल बाद उनके अचानक धर्म के प्रचार की राह छोड़ने, साध्वी जीवन त्यागने के ऐलान से हतप्रभ हैं…ऐसा क्या हुआ एक साल में, कि हर्षा का मोहभंग हो गया देखिए

प्रयागराज महाकुंभ 2025 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया

प्रयागराज महाकुंभ 2025 से सुर्खियों में आई हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) का 2026 शुरू होते ही धर्म और संन्यास से मोहभंग हो गया.. कभी माया-मोह से मुक्त होकर सनातन का प्रचार करने का दावा करने वाली हर्षा वापस ग्लैमर की गली में जाने को बेताब हैं। (Harsha Richharia disillusionment religious renunciation)मॉ़डल से साध्वी बनी रिछारिया ने जबलपुर में ये ऐलान किया कि- वो माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के बाद भगवा वेष का त्याग कर ग्लैमर की दुनिया में वापसी करेंगी…यहीं नहीं उन्होंने साधना के दौरान संपर्क में आए संतों पर कई आरोप भी लगा दिए..

हर्षा यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने ये तक दावा किया कि- पीठ पीछे उनका अपमान किया जा रहा है…और संत मिलकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक रहे हैं…

ग्लैमर वाली दुनिया में वापसी का ऐलान

यानी हर्षा रिछारिया (Harsha Richharia) ने संतों पर आरोप लगाते हुए अपनी ग्लैमर वाली दुनिया में वापसी का ऐलान कर दिया..लेकिन सवाल ये है कि- क्या हर्षा के आरोपों में कोई सच्चाई भी है? या फिर ये भी कंट्रोवर्सी के जरिए सुर्खियों में बने रहने का स्टंट है? और लोग ये भी सवाल पूछ रहे हैं कि- संन्यास लेना, धर्म के प्रति समर्पित होना, ये तो किसी को बढ़ाने या घटाने का उपक्रम ही नहीं है? तप और साधना की राह कांटों पर चलकर तय करनी होती है। (Harsha Richharia disillusionment religious renunciation) हर्षा को ये पता होगा कि साध्वी का जीवन आसान नहीं है। अगर वो वापस ग्लैमर की दुनिया में जाना चाहती हैं तो इसकी भी आजादी है… लेकिन आने और जाने की बीच का विवाद कई सवाल पैदा कर रहा है।

जबलपुर से विजेंद्र पांडेय के साथ ब्यूरो रिपोर्ट IBC24

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