मध्यप्रदेश: किसानों की ‘उपेक्षा’ के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगरा-मुंबई राजमार्ग जाम किया
मध्यप्रदेश: किसानों की ‘उपेक्षा’ के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आगरा-मुंबई राजमार्ग जाम किया
भोपाल/इंदौर, सात मई (भाषा) किसानों की समस्याओं को लेकर बृहस्पतिवार को मध्यप्रदेश में आगरा-मुंबई राजमार्ग समेत कई स्थानों पर कांग्रेस के प्रदर्शन से यातायात बाधित रहा और कुछ जगहों पर पुलिस के साथ झड़प की स्थिति भी बनी।
विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं ने शाजापुर, धार, इंदौर, ग्वालियर और मुरैना समेत कई जिलों में फैले राजमार्ग के करीब 700 किलोमीटर लंबे हिस्से में प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने भाजपा नीत सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। हजारों यात्री घंटों तक फंसे रहे। कांग्रेस ने इस आंदोलन को ‘‘किसानों की आवाज’’ बताया, जबकि भाजपा ने इसे ‘‘राजनीतिक नौटंकी’’ करार दिया।
‘चक्का जाम आंदोलन’ शाजापुर के रोजवास टोल प्लाजा, ग्वालियर के निरावली तिराहा और इंदौर बायपास समेत कई स्थानों पर किया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शाजापुर में आंदोलन का नेतृत्व करते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं ने सुबह 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक शांतिपूर्ण धरना दिया और तय समय समाप्त होने के बाद सड़क खाली कर दी। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन राजमार्ग के 700 किलोमीटर लंबे हिस्से में किया गया।
पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी और यदि सरकार किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं करती है तो पार्टी भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का घेराव कर ताला लगाएगी।
पूर्व मंत्री ने कहा, ‘‘हम किसानों के लिए 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में आंदोलन करने को मजबूर हुए। यह कोई शौक नहीं था।’’
उन्होंने यातायात बाधित होने से लोगों को हुई परेशानी के सवाल पर कहा, ‘‘हम पहले ही लोगों से माफी मांग चुके हैं।’’
पटवारी ने दावा किया कि किसानों के पास भारी मात्रा में गेहूं पड़ा है, लेकिन सरकार उसकी खरीद नहीं कर रही है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और सवाल किया कि लंबे शासनकाल के दौरान कांग्रेस ने किसानों के लिए क्या किया। यादव ने भोपाल में संवाददाताओं से कहा, ‘‘वे किस मुंह से कह रहे हैं कि किसानों के लिए लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने किसानों के साथ घोर अन्याय किया है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों के दौरान किसानों को डीजल और बिजली नहीं मिलती थी तथा उन्हें फसलों का लाभकारी मूल्य भी नहीं मिलता था।
इंदौर के पिगडंबर क्षेत्र में हुए प्रदर्शन से राजमार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने पिगडंबर में आंदोलन का नेतृत्व करते हुए कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था किसानों पर आधारित है, लेकिन भाजपा शासन में उन्हें उनका हक और न्याय नहीं मिल रहा है।
भूरिया ने सरकार की सोयाबीन ‘भावांतर योजना’ में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया और कहा कि मंडियां कॉरपोरेट घरानों का केंद्र बन गई हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं दिला पा रही है और कहा कि आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अंत में अगर किसी का गिरेबान पकड़ना पड़ा तो वह भी करेंगे।’’
धार जिले के खलघाट टोल प्लाजा पर जाम समाप्त होने के बाद नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि बेहतर दाम नहीं मिलने से किसान अपनी उपज सड़कों पर फेंकने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार निष्क्रिय बनी हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर मुख्यमंत्री को सिर्फ राजनीति करनी है तो वे पश्चिम बंगाल चले जाएं। मध्यप्रदेश में उनका क्या काम है?’’
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संदर्भ में सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता ‘‘झालमुड़ी’’ खाने में व्यस्त हैं और गेहूं तथा सोयाबीन उत्पादक किसानों की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ता सुबह से ही कई स्थानों पर एकत्र हुए और स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में राजमार्ग पर प्रदर्शन किया। इनमें शाजापुर जिले के रोजवास टोल प्लाजा पर तराना विधायक महेश परमार भी शामिल थे।
प्रदर्शन के दौरान सड़क से ट्रैक्टर हटाने को लेकर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई तथा प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
मुरैना में पहले पांच घंटे के जाम की घोषणा की गई थी, लेकिन प्रदर्शन करीब एक घंटे तक ही चला। बाद में पुलिस ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर ग्वालियर भेज दिया और यातायात बहाल कराया।
ग्वालियर में प्रशासन ने प्रदर्शनकारी कांग्रेस नेताओं को दो मिनट के भीतर सड़क खाली करने को कहा। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर थाने पहुंचाया। भिंड में कांग्रेस नेता राहुल भदौरिया और एक पुलिसकर्मी के बीच झड़प भी हुई।
मुरैना के पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने जबरन सड़क जाम कराने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।
भाषा सं दिमो हर्ष आशीष
आशीष

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