मप्र सरकार ने कोयला गैसीकरण पर अध्ययन करने, नीति बनाने का फैसला किया

मप्र सरकार ने कोयला गैसीकरण पर अध्ययन करने, नीति बनाने का फैसला किया

मप्र सरकार ने कोयला गैसीकरण पर अध्ययन करने, नीति बनाने का फैसला किया
Modified Date: June 1, 2026 / 06:27 pm IST
Published Date: June 1, 2026 6:27 pm IST

भोपाल, एक जून (भाषा) मध्यप्रदेश सरकार ने सोमवार को राज्य के विशाल कोयला भंडार का दोहन करने और देश में कोयला गैसीकरण कार्य को प्राथमिकता देने के केंद्र के फैसले का लाभ उठाने के उद्देश्य से एक अध्ययन करने और फिर नीति तैयार करने का फैसला किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने कहा कि कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी बिजली उत्पादन, रासायनिक संश्लेषण और ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने निर्देश दिया है कि देश में कोयला गैसीकरण के काम को प्राथमिकता दी जाए और मध्यप्रदेश में कोयला गैसीकरण की अपार संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) नीरज मंडलोई की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, “मध्यप्रदेश के उपलब्ध कोयला संसाधनों और औद्योगिक बुनियादी ढांचे का लाभ उठाकर कोयला गैसीकरण क्षेत्र को प्रोत्साहित करने से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार पैदा करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।”

उन्होंने कहा कि औद्योगिक नीति और निवेश संवर्धन विभाग को इस कार्य के लिए नोडल विभाग के रूप में नामित किया गया है, जिसमें देश में वर्तमान में लागू कोयला गैसीकरण नीति का अध्ययन एवं विश्लेषण करना और मध्यप्रदेश के लिए कोयला गैसीकरण नीति तैयार करना शामिल है।

मंडलोई ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नीति को प्राथमिकता के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए और निर्धारित समय सीमा के भीतर मंत्रिपरिषद के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “कोयला गैसीकरण में कोयले को उच्च तापमान पर ऑक्सीजन, भाप या कार्बन डाइऑक्साइड के साथ प्रतिक्रिया कराके सिंथेटिक गैस (सिनगैस) में बदला जाता है।”

मंडलोई ने बताया कि मोदी सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए एक रणनीतिक पहल के रूप में कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के वास्ते व्यापक नीतिगत ढांचा पेश किया है।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने हाल में 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी है।

मंडलोई ने कहा, “यह भारत की ऊर्जा नीति में एक ऐतिहासिक निर्णय का प्रतिनिधित्व करता है और आर्थिक विकास एवं ऊर्जा स्वतंत्रता के लिए कोयला गैसीकरण प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण कोयला भंडार और एक स्थापित औद्योगिक आधार के साथ भारत के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में शामिल होने के नाते, कोयला गैसीकरण नीति से लाभ उठाने के लिए विशिष्ट स्थिति में है।

मंडलोई ने कहा कि राज्य में प्रचुर मात्रा में कोयला भंडार और खनन बुनियादी ढांचा, मौजूदा औद्योगिक और बिजली उत्पादन सुविधाएं, एक कुशल कार्यबल और तकनीकी विशेषज्ञता, औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच के साथ एक रणनीतिक भौगोलिक स्थान, सिनगैस उत्पादों के आधार पर डाउनस्ट्रीम उद्योगों को विकसित करने का अवसर और कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के माध्यम से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की क्षमता है।

अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2030 तक 100 मीट्रिक टन कोयले को गैसीकृत करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (2021) शुरू किया, जो इस प्रौद्योगिकी को रणनीतिक महत्व दिेए जाने का संकेत है।

मंडलोई ने कहा कि शुरू में (जनवरी 2024) कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 8,500 करोड़ रुपये की एक योजना को मंजूरी दी गई थी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत वर्तमान में 6,233 करोड़ रुपये की आठ परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।

भाषा

ब्रजेन्द्र पारुल

पारुल


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