मध्यप्रदेश के चंबल में पारंपरिक लोक उत्सव के दौरान ‘गोलीबारी’ के मामले की पुलिस ने शुरू की जांच

मध्यप्रदेश के चंबल में पारंपरिक लोक उत्सव के दौरान ‘गोलीबारी’ के मामले की पुलिस ने शुरू की जांच

मध्यप्रदेश के चंबल में पारंपरिक लोक उत्सव के दौरान ‘गोलीबारी’ के मामले की पुलिस ने शुरू की जांच
Modified Date: August 31, 2026 / 12:33 am IST
Published Date: August 31, 2026 12:33 am IST

मुरैना, 30 अगस्त (भाषा) मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में रक्षाबंधन से जुड़े एक पारंपरिक लोक उत्सव के दौरान मटकी फोड़ने की एक प्रतियोगिता में कथित तौर पर बंदूकों से गोलियां चलाई गईं, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस के एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि भुजरिया समारोह में ‘मटकी फोड़’ कार्यक्रम के दौरान कोई हताहत तो नहीं हुआ। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

‘मटकी फोड़’ चंबल क्षेत्र के कुछ गांवों में एक स्थानीय परंपरा का हिस्सा है, जहां आमतौर पर मिट्टी के बर्तनों को बंदूकों से तोड़ने की परंपरा है।

यह क्षेत्र कभी डकैतों का गढ़ हुआ करता था और अतीत में वे यहां स्वतंत्र रूप से घूमते थे।

घटना का वीडियो कथित तौर पर जौरा तहसील के परसोटा गांव का है, जिसमें लगभग 50 से 60 लोगों को एक तालाब के पास एक पंक्ति में बैठे और सामने रखे बर्तनों पर लाइसेंसी बंदूकों से निशाना साधते हुए देखा जा सकता है। इस दौरान वहां बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद थे।

जौरा पुलिस के प्रभारी अधिकारी पंकज यादव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लिया है और घटना से जुड़ीं परिस्थितियों की जांच कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या कार्यक्रम के लिए प्रशासनिक अनुमति ली गई थी और क्या इन हथियारों का इस्तेमाल नियमों के अनुसार किया गया था।’

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक प्रशासनिक टीम ने 29 अगस्त को मुख्यमंत्री के जन संवाद कार्यक्रम के तहत गांव का दौरा किया था।

यादव ने कहा कि टीम के गांव से निकलने के बाद गोलीबारी की घटना हुई थी।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने स्थानीय सरपंच और कुछ ग्रामीणों को पूछताछ के लिए बुलाया है।

चंबल क्षेत्र के कुछ गांवों में, रक्षाबंधन के दौरान मनाए जाने वाले भुजरिया त्योहार के दौरान पारंपरिक रूप से बर्तन तोड़ने की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।

यह मेला महोबा के महान योद्धाओं अल्हा और ऊदल से जुड़ा हुआ है। यह रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग गेहूं के नए अंकुर चढ़ाकर एक-दूसरे को सम्मान देते हैं।

भाषा सं ब्रजेन्द्र अविनाश जोहेब

जोहेब


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