Vikrant Bhuria wrote a letter to Mohan Yadav: 26 आदिवासी बच्चों की मौत पर विक्रांत भूरिया ने सीएम को लिखा पत्र, स्वास्थ्य मंत्री से मांगा इस्तीफा, रखीं ये 3 बड़ी मांगें

Vikrant Bhuria wrote a letter to Mohan Yadav: 26 आदिवासी बच्चों की मौत पर विक्रांत भूरिया ने सीएम को लिखा पत्र, स्वास्थ्य मंत्री से मांगा इस्तीफा, रखीं ये 3 बड़ी मांगें

Vikrant Bhuria wrote a letter to Mohan Yadav: 26 आदिवासी बच्चों की मौत पर विक्रांत भूरिया ने सीएम को लिखा पत्र, स्वास्थ्य मंत्री से मांगा इस्तीफा, रखीं ये 3 बड़ी मांगें

Vikrant Bhuria wrote a letter to Mohan Yadav: 26 आदिवासी बच्चों की मौत पर विक्रांत भूरिया ने सीएम को लिखा पत्र, स्वास्थ्य मंत्री से मांगा इस्तीफा, रखीं ये 3 बड़ी मांगें /image: Social Media

Modified Date: August 30, 2026 / 03:21 pm IST
Published Date: August 30, 2026 3:18 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बालाघाट में 26 आदिवासी बच्चों की मौत के मामले पर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को घेरा है
  • विक्रांत भूरिया ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से इस्तीफे की मांग की है
  • कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच, सभी मौतों का मेडिकल व प्रशासनिक ऑडिट और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने समेत तीन प्रमुख मांगें रखी हैं

भोपाल। Vikrant Bhuria wrote a letter to Mohan Yadav: मध्यप्रदेश के बालाघाट में 26 आदिवासी बच्चों की मौत (Balaghat Tribal Children Death) पर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। इस मामले में अब आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विक्रांत भूरिया (congress state president vikrant bhuria) ने सीएम डॉ मोहन यादव (CM Mohan Yadav) को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि 26 बच्चों की मौत के लिए नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से तत्काल इस्तीफ़ा ( Rajendra Shukla Resignation) लेने की मांग की है।

Vikrant Bhuria wrote a letter to Mohan Yadav उनका कहना है कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता और सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का परिणाम है। बालाघाट में बैगा समाज के 26 आदिवासी बच्चों की कुपोषण, मलेरिया एवं खसरा जैसी बीमारियों से हुई मृत्यु कोई सामान्य घटना नहीं है। यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता और सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बैगा समाज विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है। इस समुदाय के 26 परिवारों ने अपने मासूम बच्चों को खोया है। यदि समय रहते स्वास्थ्य विभाग सजग होता, बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच एवं टीकाकरण सुनिश्चित किया जाता और कई जानें बचाई जा सकती थीं।

सीएम को लिखे पत्र में डॉ भूरिया ने क्या लिखा? (Vikrant Bhuria wrote a letter to Mohan Yadav:)

बालाघाट में बैगा समाज के 26 आदिवासी बच्चों की कुपोषण, मलेरिया एवं खसरा जैसी बीमारियों से हुई मृत्यु कोई सामान्य घटना नहीं है। यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता और सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही का परिणाम है।

बैगा समाज विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है। यदि समय पर बच्चों की स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, मलेरिया की रोकथाम और समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाता, तो अनेक मासूम जिंदगियों बचाई जा सकती थीं।

मुख्यमंत्री जी बालाघाट कोई अकेली घटना नहीं है। मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार गंभीर विफलताओं से जूझ रही है। इंदौर में अस्पताल में नवजात बच्चे को चूहे द्वारा कुतरे जाने और उसकी मृत्यु, छिंदवाड़ा के कफ सिरप कांड में 22 से अधिक बच्चों की मौत और सतना में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने से 6 बच्चों के प्रभावित होने जैसे मामले स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब बालाघाट में 26 आदिवासी बच्चों की मृत्यु इस बदहाल व्यवस्था की एक और भयावह कड़ी है।

आपका बालाघाट जाकर पीड़ित परिवारों से मिलना आवश्यक था, लेकिन केवल दौरे और संवेदना से जवाबदेही पूरी नहीं होती। जब प्रदेश में एक के बाद एक ऐसी घटनाएँ हो रही हैं, तो जिम्मेदारी केवल निचले अधिकारियों पर डालकर विभागीय नेतृत्व को जवाबदेही से मुक्त नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य विभाग के मुखिया के रूप में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्त को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

अतः मेरी तीन स्पष्ट मांगें हैं-

1. स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से तत्काल इस्तीफा लिया जाए तथा बालाघाट प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

2. सभी 26 बच्चों की मृत्यु का मेडिकल एवं प्रशासनिक ऑडिट कराया जाए तथा प्रत्येक पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा एवं आवश्यक सहायता तत्काल दी जाए।

3. प्रभावित देगा क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान चलाकर प्रत्येक बच्चे की स्क्रीनिंग, टीकाकरण, मलेरिया जांच एवं कुपोषण का उपचार सुनिश्चित किया जाए तथा आंगनवाड़ी, पोषण आहार और स्वास्थ्य सेवाओं में हुई लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए।

 

 

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.