Balaghat Malaria Death: बारिश के मौसम में फैली खतरनाक बीमारी! इस जिले में अब तक 10 लोगों की मौत, ग्रामीणों में दहशत का माहौल

बारिश के मौसम में फैली खतरनाक बीमारी! इस जिले में अब तक 10 लोगों की मौत, Balaghat Malaria Deaths: 10 Deaths Cause Panic in MP

Balaghat Malaria Death: बारिश के मौसम में फैली खतरनाक बीमारी! इस जिले में अब तक 10 लोगों की मौत, ग्रामीणों में दहशत का माहौल
Modified Date: August 30, 2026 / 04:43 pm IST
Published Date: August 30, 2026 4:42 pm IST

बालाघाट। Balaghat Malaria Death: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में इन दिनों मलेरिया का कहर जारी है। दक्षिण बैहर के आदिवासी अंचल में मलेरिया, मिजल्स और बुखार जैसी बीमारियों के बीच बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में दो अलग-अलग मामलों में दो बच्चों की मौत सामने आई है। मोहनपुर गांव की 10 वर्षीय काजल सैयाम की मलेरिया से पीड़ित होने के बाद गोंदिया में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, परसाटोला ग्राम पंचायत के बैगा टोला में ढाई वर्षीय हिमांशु मिरावी ने तेज बुखार के बाद दम तोड़ दिया।

Balaghat Malaria Death: जानकारी के मुताबिक मोहनपुर निवासी काजल सैयाम पिछले कुछ दिनों से मलेरिया से पीड़ित थी। हालत बिगड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए गोंदिया ले जाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। काजल की मौत के बाद गांव में शोक का माहौल है। इधर, परसाटोला ग्राम पंचायत के बैगा टोला में ढाई साल के हिमांशु मिरावी की भी बुखार के बाद मौत हो गई। परिजनों के अनुसार बुधवार से हिमांशु को तेज बुखार था। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उसका मलेरिया टेस्ट कराया गया था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आने की बात कही जा रही है। परिजनों का आरोप है कि मलेरिया रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद बच्चे को दवा नहीं दी गई। करीब तीन दिन बाद उसकी हालत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई।

लगातार मौतों से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

दक्षिण बैहर क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे बच्चों की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाके में मलेरिया और मिजल्स के मामले सामने आने के बीच ग्रामीणों में बीमारी को लेकर भय और चिंता का माहौल है। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं और बीमारी की रोकथाम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो महीनों में क्षेत्र में 10 बच्चों की मौत हुई है। वहीं कांग्रेस का दावा है कि अब तक 26 बच्चों की जान जा चुकी है। हालांकि दोनों आंकड़ों में अंतर है, लेकिन लगातार हो रही मौतों ने दक्षिण बैहर के आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य संकट की गंभीरता को उजागर किया है। दो बच्चों की हालिया मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप की स्थिति है। अब प्रभावित गांवों में बीमारी की वास्तविक स्थिति, मौतों के कारण और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर प्रशासन की निगरानी और जांच पर नजर है।

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लेखक के बारे में

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