शह मात The Big Debate: ‘अफसर सीखें प्रोटोकॉल..’ बर्ताव पर उठे सवाल! कटघरे में आए गालीबाज अधिकारी! केंद्र को क्यों पड़ी मुख्य सचिव निर्देश देने की जरूरत

MP Officers Protocol News: केंद्र सरकार ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को लिखा पत्र लिखकर। केंद्र ने पत्र में जनप्रतिनिधियों का पक्ष लिया।

शह मात The Big Debate: ‘अफसर सीखें प्रोटोकॉल..’ बर्ताव पर उठे सवाल! कटघरे में आए गालीबाज अधिकारी! केंद्र को क्यों पड़ी मुख्य सचिव निर्देश देने की जरूरत

MP Officers Protocol News/Image Credit: IBC24.in

Modified Date: May 6, 2026 / 11:04 pm IST
Published Date: May 6, 2026 11:04 pm IST
HIGHLIGHTS
  • मध्यप्रदेश में नेताओं और अफसरों के बीच टकराव के मामलों में हो रही बढ़ोतरी।
  • केंद्र सरकार ने मुख्य सचिव अनुराग जैन को लिखा पत्र लिखकर।
  • केंद्र ने पत्र में जनप्रतिनिधियों का पक्ष लिया।

MP Officers Protocol News: भोपाल: भिंड के तत्कालीन कलेक्टर हैं संजीव श्रीवास्तव इन्होंने विधायक नरेंद्र कुशवाहा को सबसे बड़ा चोर कहा थ। दूसरी तस्वीरमें आई पी एस आयुष जाखड़ हैं जो विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश को कानून का पाठ पढ़ा रहे हैं। वहीं कुछ दिनों पहले कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह को लेकर आई ए एस अरविन्द शाह की महिला कर्मचारी से हुई नोंकझोंक भी सुर्खियों में रही। सिर्फ यहीं नहीं – नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से छिंदवाड़ा और सीहोर में कलेक्टर का ज्ञापन लेने नहीं आना भी- खूब सुर्खियों में रहा। (MP Officers Protocol News) शायद ऐसी ही कुछ और घटनाओं ने केन्द्रीय कार्मिक प्रशासन को नई एडवाइजरी के लिए बाध्य किया। मंत्रालय से ज़ारी एक एडवायजरी में चीफ सेकेट्री को निर्देश दिया गया है कि- अधिकारियों को उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का एहसास कराया जाए, ताकि जनप्रतिनिधियों के साथ सही व्यवहार हो सके, तो कांग्रेस कह रही है कि मध्यप्रदेश में जनप्रतिनिधियों और अफसर का गठजोड़ है,जिसके चलते एक दूसरे का लिहाज नहीं करते हैं।

सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं से अधिकारियों के टकराव के मामले सामनेे आते रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों को लेकर केंद्र की नई एडवायजरी पर बीजेपी संतुलन बनाती नजर आ रही है। भाजपा कह रही है कि कांग्रेस एक तरफ तो कहती है कि अधिकारी हमारे एजेंट की तरह काम करते हैं दूसरी तरफ उन्हें पीड़ित बताती है..(MP Officers Protocol News)  कांग्रेस पहले अपना स्टैंड क्लियर करे।

कुलमिलाकर नेताओं और अफसरों के बीच टकराव और नई एडवाइजरी के बाद कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। ऐसे में सवाल ये कि सिर्फ अधिकारियों को चेताना क्या उचित है? सवाल ये कि इस नई गाइड लाइन के बाद क्या ये टकराव रुकेगा? सवाल ये कि क्या अब सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के नेताओं को भी सम्मान मिलने लगेगा? (MP Officers Protocol News)  सवाल ये भी कि अधिकारियों के संगठन क्या अब नेताओं के विरोध का लेटर तत्काल ज़ारी करेंगे या एक बार पुनर्विचार करेंगे?

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