विदिशा के नौ छात्र जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते थे, अब गांव के पास शुरू हुई पढ़ाई
विदिशा के नौ छात्र जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते थे, अब गांव के पास शुरू हुई पढ़ाई
विदिशा, पांच अगस्त (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा में जान जोखिम में डालकर बेतवा नदी के ‘चेक डैम’ के खुले दरवाजों के ऊपर से छलांग लगाकर स्कूल जाने वाले कुछ छात्रों का वीडियो वायरल होने के कुछ दिन बाद प्रशासन ने उनके गांव के नजदीकी पूर्व माध्यमिक विद्यालय का हाईस्कूल में उन्नयन करने का आदेश दिया, जहां बुधवार से ही नौवीं-10वीं की कक्षाएं शुरू हो गईं।
दरअसल, जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर ककरुआ गांव के नौ छात्र-छात्राएं पलोह उच्च विद्यालय में पढ़ने के लिए बेतवा नदी पर बने ‘चेक डैम’ को पार करके स्कूल आया-जाया करते थे, क्योंकि इससे उन्हें एक तरफ से करीब डेढ़ किलोमीटर का ही सफर तय करना पड़ता था, जबकि सुरक्षित मार्ग से आवागमन पर यह दूरी लगभग आठ किलोमीटर हो जाती थी।
इन बच्चों के स्कूल आने-जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया, जिसके बाद स्थानीय एसडीएम क्षितिज शर्मा ने तहसीलदार विदिशा, जनपद पंचायत विदिशा के मुख्य कार्यपालिका अधिकारी एवं लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री के साथ मौके का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने बताया कि जांच में पाया गया कि ‘चेक डैम’ को पार करके बच्चों का आना-जाना जोखिम भरा है, जबकि जीवाजीपुर सौरई गांव से जाने वाला सुरक्षित मार्ग करीब आठ किलोमीटर लंबा है।
अधिकारियों के मुताबिक, प्रशासन को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में बताया गया कि पलोह उच्च विद्यालय में कक्षा नौ के 38 और 10 के 32 विद्यार्थी हैं, जिनमें ककरुआ के छात्रों की संख्या केवल नौ है।
जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि छात्रों की वाजिब समस्या को देखते हुए ककरुआ के पास बंधेरा गांव स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय का उन्नयन कर दिया गया, ताकि बच्चों को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
उन्होंने कहा, “सभी नौ बच्चों को पलोह से बंधेरा स्थानांतरित कर दिया गया है और आज से उनकी कक्षाएं भी शुरू कर दी गई हैं।”
अहिरवार ने बताया कि इससे पहले प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर लोक निर्माण विभाग से ‘चेक डैम’ के दोनों ओर बैरिकेड लगवाए थे और ग्राम चौकीदार को विद्यार्थियों का आवागमन रोकने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा अभिभावकों को समझाया गया कि वे बच्चों को ‘चेक डैम’ के रास्ते स्कूल न भेजें।
एसडीएम के अनुसार, पहले ककरुआ के पांच छात्र ही पलोह पढ़ने जाया करते थे और बाकी चार ने 2026 में वहां दाखिला लिया।
उन्होंने बताया कि शुरुआती पांच बच्चों को निशुल्क साइकिल भी दी गई थी, लेकिन जांच में पाया गया वे इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे थे।
एसडीएम ने बताया कि बाकी चार छात्रों को साइकिल देने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा था।
भाषा
सं ब्रजेन्द्र पारुल
पारुल

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