HIGHLIGHTS
- मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 27% ओबीसी आरक्षण देने की मांग की।
- सरकार ने छत्तीसगढ़ मॉडल को आधार बनाकर अंतरिम आदेश की मांग की।
- सुप्रीम कोर्ट ने अगले हफ्ते एमपी के मामलों पर अलग से सुनवाई तय की।
जबलपुरः मध्यप्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से एमपी में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण देने की राहत मांगी है। सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि छत्तीसगढ़ की तरह एमपी में भी बढ़ा हुआ आरक्षण देने की छूट अंतरिम आदेश से दे दी जाए, भले फिर कोर्ट आरक्षण को अपने अंतिम फैसले के अधीन रख ले। दरअसल छत्तीगढ़ में आदिवासी आरक्षण बढ़ाए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को 58 फीसदी आरक्षण देने का अंतरिम आदेश जारी किया हुआ है और मामला अंतिम फैसले के लिए लंबित है।
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आज हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि एमपी और छत्तीसगढ़ के आरक्षण के मामलों में ऐसी क्या समानता है कि दोनों राज्यों के आरक्षण मामले एक साथ सुने जाएं। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने ये तर्क आया कि दोनों मामले अलग हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ में बढ़ा हुआ आदिवासी आरक्षण देने पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी और एमपी में बढ़ा हुआ ओबीसी आरक्षण देने के कानून पर अब तक कोर्ट की रोक नहीं है।
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ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने एमपी के ओबीसी आरक्षण से जुड़े 2 मामलों पर अगले हफ्ते अलग से सुनवाई करना तय किया है। कोर्ट ने ये भी कहा कि अगली सुनवाई में वो ये भी तय करेगी कि दोनों राज्यों के मामले एक साथ सुने जा सकते हैं या नहीं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने एमपी के ओबीसी आरक्षण पर अगले हफ्ते सुनवाई तय कर दी है।
क्या मध्यप्रदेश में OBC को अभी 27% आरक्षण मिल रहा है?
नहीं, मामला अभी कोर्ट में लंबित है और सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत की मांग की गई है।
छत्तीसगढ़ में कितना आरक्षण दिया जा रहा है?
छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण (आदिवासी वर्ग सहित) की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने एमपी की याचिका पर क्या कहा है?
कोर्ट ने कहा कि वह अगले सप्ताह एमपी के दो मामलों पर अलग से सुनवाई करेगा और यह भी तय करेगा कि दोनों राज्यों के मामले साथ सुने जा सकते हैं या नहीं।
क्या यह फैसला अंतिम होगा?
नहीं, अगली सुनवाई में केवल अंतरिम राहत और मामले की प्रक्रिया पर फैसला होगा, अंतिम निर्णय बाद में होगा।
इससे किन लोगों को फायदा हो सकता है?
यदि कोर्ट अंतरिम राहत देता है, तो मध्यप्रदेश के ओबीसी वर्ग के छात्रों व उम्मीदवारों को नौकरी और शिक्षा में आरक्षण का सीधा लाभ मिलेगा।