इंदौर में दूषित पेयजल से ही फैला था उल्टी-दस्त का प्रकोप, प्रयोगशाला जांच में पुष्टि

इंदौर में दूषित पेयजल से ही फैला था उल्टी-दस्त का प्रकोप, प्रयोगशाला जांच में पुष्टि

  •  
  • Publish Date - January 1, 2026 / 09:15 PM IST,
    Updated On - January 1, 2026 / 09:15 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), एक जनवरी (भाषा) देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में उल्टी-दस्त से पीड़ित होने के बाद कम से कम चार मरीजों की मौत और 1,400 से ज्यादा लोगों के प्रभावित होने के बीच एक प्रयोगशाला की जांच में पुष्टि हुई है कि यह प्रकोप दूषित पेयजल के कारण फैला था। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने संवाददाताओं को बताया कि शहर के एक चिकित्सा महाविद्यालय की प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइपलाइन में लीकेज के कारण पेयजल दूषित हुआ था।

उन्होंने जांच रिपोर्ट का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।

अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में उस जगह लीकेज मिला, जिसके ऊपर एक शौचालय बना हुआ है। अधिकारियों का दावा है कि इस लीकेज के कारण ही पेयजल दूषित हुआ।

राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हम भागीरथपुरा में पेयजल आपूर्ति की पूरी पाइपलाइन की बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि पता चल सके कि किसी और जगह तो लीकेज नहीं है।’’

उन्होंने बताया कि जांच-पड़ताल के बाद भागीरथपुरा के घरों में बृहस्पतिवार को इस पाइपलाइन से स्वच्छ जल पहुंचाया गया, हालांकि एहतियात के तौर पर लोगों से कहा गया है कि वे इस पानी को उबालने के बाद ही पीने के लिए इस्तेमाल करें।

दुबे ने कहा, ‘‘हमने इस पानी के भी नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं।’’

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि भागीरथपुरा के दूषित पेयजल कांड से सबक लेते हुए प्रदेश भर के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो।

दुबे, मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर हालात का जायजा लेने भागीरथपुरा पहुंचे थे।

स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को भागीरथपुरा में 1,714 घरों के सर्वेक्षण के दौरान 8,571 लोगों की जांच की गई। अधिकारी के मुताबिक, इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण मिलने पर उन्हें उनके घरों में प्राथमिक उपचार दिया गया।

उन्होंने बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप के कारण गुजरे आठ दिनों में स्थानीय अस्पतालों में 272 मरीजों को भर्ती किया गया है, जिनमें से 71 लोगों को छुट्टी दी जा चुकी है।

अधिकारी ने बताया कि फिलहाल अस्पतालों में 201 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 32 लोग गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में हैं।

भाषा हर्ष सुरेश

सुरेश