बालाघाट में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की मौत, उच्च न्यायालय का सरकार को नोटिस
बालाघाट में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की मौत, उच्च न्यायालय का सरकार को नोटिस
जबलपुर, 10 सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया तथा न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार के स्वास्थ विभाग, महिला एव बाल विकास विभाग और बालाघाट के जिलाधिकारी कलेक्टर सहित सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
गौरतलब है कि नरसिंहपुर जिले के निवासी अंशुल तिवारी ने समाचार पत्रों में प्रकशित खबरों के आधार पर बालाघाट में संक्रामक बीमारियों के कारण 30 से अधिक बच्चों की मौत के संबंध में जनहित याचिका दायर की थी।
याचिका में कहा गया था कि बच्चों को पर्याप्त उपचार नही मिल रहा है और 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
पिछले दिनों खंडपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा था कि महज समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर जनहित याचिका दाखिल करना उचित नहीं है।
खंडपीठ ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में पहले मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का पता लगाना आवश्यक है।
इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया था कि वह बालाघाट के प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लें, तथ्यों की पड़ताल करें और अपनी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।
अधिवक्ता अभिषेक पांडे और अधिवक्ता अतुल शुक्ला ने बुधवार को सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया कि अदालत के आदेश पर याचिकाकर्ता ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से तैयार की गयी रिपोर्ट भी हलफनामे के साथ खंडपीठ के समक्ष पेश की गई।
याचिकाकर्ता ने रिपोर्ट में दावा किया कि प्रभावित क्षेत्र में लगे हैंडपंप से पीला पानी आ रहा है, बच्चों तथा महिलाओं को कई महीनों से समय पर पोषक आहार नही दिया जा रहा है और क्षेत्र में व्यापक स्तर पर गंदगी थी।
रिपोर्ट में कहा गया है इन्हीं कारणों से संक्रमण फैल रहा है और बीमारियों से बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है।
रिपोर्ट में कहा गया कि 30 से अधिक मौतों के बाद अब जाकर प्रशासन जागा है और अस्पतालों में बिस्तर की संख्या बढाई गई है तथा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारी गईं एवं साफ-सफाई की व्यवस्था की गई है।
रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 18 सितम्बर को निर्धारित की गई है।
भाषा सं ब्रजेन्द्र मनीषा
मनीषा

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