Pujari Tiger Death: उमरिया के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बेहद भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। बांधवगढ़ का पुजारी अब शांत हो गया है। सैलानियों का सबसे चहेता और अपनी अनूठी आदतों के लिए मशहूर बाघ पुजारी आपसी संघर्ष में अपनी जान गंवा बैठा है। बाघ की मौत के बाद न केवल पार्क प्रबंधन बल्कि पर्यटकों में भी शोक की लहर है।
जंगल की लड़ाई में हुई मौत
बांधवगढ़ की फिजाओं में आज सन्नाटा है। खितौली के जंगलों की वो दहाड़ अब हमेशा के लिए खामोश हो गई है, जिसे सुनने और देखने के लिए देश-दुनिया से पर्यटक खींचे चले आते थे। हम बात कर रहे हैं बांधवगढ़ के सबसे चर्चित बाघ पुजारी की। खितौली कोर जोन की पश्चिम बगदरी बीट में पुजारी का शव मिला। उसकी मौत किसी बीमारी या शिकार से नहीं, बल्कि जंगल के वर्चस्व की लड़ाई में हुई है।
क्यों पड़ा इस बाघ का नाम पुजारी?
इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और आध्यात्मिक वजह थी। यह बाघ अक्सर सुबह-सुबह जलाशय में नहाता था और उसके बाद जिस तरह से खड़ा होता था, मानों वह सूर्य देवता को नमस्कार कर रहा हो। उसकी इसी सौम्य छवि और अनुशासन के कारण पर्यटकों और गाइडों ने उसे पुजारी का नाम दिया था। सैलानियों के बीच वह सबसे ज्यादा कैमरा फ्रेंडली बाघ माना जाता था।
लहूलुहान मिला था शव
बताया जा रहा है कि खितौली के इस इलाके पर कब्जे को लेकर पुजारी और D-1 नाम के बाघ के बीच पिछले कुछ समय से खींचतान चल रही थी। ढमढमा कैंप के पास सुरक्षा श्रमिकों ने बाघों के लड़ने की भयानक आवाजें सुनी थीं। जब गश्ती दल ने छानबीन की, तो पुजारी का लहूलुहान शव मिला। शरीर पर गहरे घाव के निशान थे, जो इस बात की तस्दीक कर रहे थे कि मौत आपसी संघर्ष में हुई है।
पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
घटना की जानकारी मिलते ही पार्क प्रबंधन ने NTCA की गाइडलाइन के मुताबिक कार्यवाही शुरू की। डॉग स्क्वाड और हाथी दल की मदद से पूरे इलाके की सर्चिंग की गई ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जांच की जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों और वेटरनरी डॉक्टरों की मौजूदगी में पुजारी का पोस्टमार्टम किया गया और उसके बाद पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार यानी शवदाह कर दिया गया।
पुजारी की मौत से बांधवगढ़ ने अपना एक गौरव खो दिया है। भले ही वह एक जंगली जानवर था, लेकिन उसकी मौजूदगी सैलानियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होती थी। आज जब पुजारी पंचतत्व में विलीन हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं।