इंदौर, 21 सितंबर (भाषा) भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमांग जोशी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर सोमवार को निशाना साधते हुए दावा किया कि गांधी इसमें किसी पावरप्वाइंट प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) की तरह रटे-रटाए तौर पर वही बातें दोहराते हैं, जो उनका जनसंपर्क (पीआर) दल उन्हें लिखकर देता है।
जोशी ने इंदौर में संवाददाताओं से बातचीत में राहुल गांधी के युवा संपर्क अभियान ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को ‘झूठ की गूंज’ करार दिया।
उन्होंने कहा कि इस अभियान की सभाओं में गांधी पीपीटी प्रस्तुतीकरण की तरह रटे-रटाए तौर पर सिर्फ वही बातें कहते हैं जो उनका पीआर दल उन्हें लिखकर देता है।
जोशी ने दावा किया कि अगर यह पीपीटी प्रस्तुतीकरण बंद हो जाए और श्रोता उनसे एक भी सवाल कर लें, तो गांधी कुछ भी बोल नहीं सकेंगे।
भारतीय जनता पार्टी की युवा इकाई के अध्यक्ष ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘जितनी चाबी भरी राम ने, उतना चले खिलौना।’’
जोशी ने राहुल गांधी के ‘भारत जोड़ो अभियान’ को ‘भारत तोड़ो अभियान’ करार देते हुए दावा किया कि इस मुहिम के बाद उनकी पार्टी टूट गई।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जोरदार जीत का हवाला दिया और कहा कि एक तरफ गांधी इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ का कार्यक्रम कर रहे थे, तो दूसरी ओर अभाविप ने इस चुनाव में उन्हें ‘छात्रों की हुंकार’ दिखा दी।
भाजयुमो अध्यक्ष ने कहा, ‘‘गांधी समझ रहे हैं कि दूसरे देशों के युवाओं की तरह भारतीय युवा भी अराजकता फैलाकर सत्ता हथियाने के उनके हथकंडे में फंस जाएंगे, लेकिन भारत के युवा राष्ट्रप्रेमी हैं। वे विकसित भारत का संकल्प लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ डटकर खड़े हैं और गांधी को आज नहीं, तो कल इस बात को समझना पड़ेगा।’’
जोशी, मोदी के 76वें जन्मदिन और निर्वाचित जनप्रतिनिधि के तौर पर उनके सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के अवसर पर गुजरात के वडनगर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक निकाली जा रही ‘सेवा संकल्प यात्रा’ में शामिल होने मध्यप्रदेश आए हैं।
राहुल गांधी ने 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ के तहत हजारों विद्यार्थियों को संबोधित किया था।
उन्होंने केंद्र सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को बदहाल करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि एक ‘सिस्टम’ ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया है और वह नहीं चाहता कि छात्र उसके सामने अपने बुनियादी मुद्दों को लेकर सवाल उठाएं। गांधी ने यह भी कहा था कि यह ‘सिस्टम’ छात्र नहीं, बल्कि ‘अंधभक्त’ तैयार करता है।
भाषा हर्ष वैभव
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