Sagar Fake DSP Arrest: फर्जी DSP गैंग का भंडाफोड़! बिना नंबर की गाड़ी, फर्जी वर्दी और बड़ी-बड़ी बातें… लेकिन चाय कैफे में ऐसे बदल दी पूरी कहानी

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Sagar Fake DSP Arrest: फर्जी DSP गैंग का भंडाफोड़! बिना नंबर की गाड़ी, फर्जी वर्दी और बड़ी-बड़ी बातें… लेकिन चाय कैफे में ऐसे बदल दी पूरी कहानी

  • Reported By: Nafees Khan

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  • Publish Date - February 19, 2026 / 07:54 AM IST,
    Updated On - February 19, 2026 / 07:58 AM IST

Sagar Fake DSP Arrest/Image Source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • मध्य प्रदेश में बड़ा खुलासा
  • फर्जी DSP बनकर घूम रहा था ठग
  • चाय कैफे से हुआ गिरफ्तार

सागर: Sagar Fake DSP Arrest:  मध्य प्रदेश के सागर जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस की वर्दी में फर्जी DSP बनकर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। जिले की शाहगढ़ थाना पुलिस ने नकली DSP सहित दो नकली पुलिस आरक्षकों को गिरफ्तार किया है, जो खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे थे। चार माह पहले भी यही नकली DSP, नकली टीआई के भेष में ग्वालियर क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा था।

फर्जी DSP समेत दो नकली आरक्षक दबोचे (Sagar Fake DSP Case)

Sagar Fake DSP Arrest:  दरअसल पुलिस के अनुसार फरियादी ने सूचना दी थी कि शिवम चतुर्वेदी नाम का शख्स खुद को जबलपुर में पदस्थ DSP बताकर लोगों को प्रभावित करता था। उसके साथ दो युवक फर्जी पुलिस आरक्षक बनकर चलते थे। फरियादी युवक को होमगार्ड में नौकरी दिलाने का प्रलोभन दिया गया था। इसके बदले 1 लाख रुपये की मांग की गई थी। तय योजना के अनुसार आरोपी बिना नंबर की नई बोलेरो गाड़ी से सागर जिले के शाहगढ़ पहुंचे और वहां एक चाय कैफे में बैठकर धौंस जमाने लगे। लेकिन सामने बैठा फरियादी युवक उनकी हर बात गौर से सुनता रहा। उसे वर्दी, गाड़ी और बातचीत सब कुछ बनावटी सा लगा। शक गहराया तो उसने चुपचाप असली पुलिस को सूचना दे दी। कुछ ही देर में चाय कैफे के बाहर असली पुलिस पहुंच गई और समय रहते कार्रवाई कर उन्हें हिरासत में ले लिया।

शाहगढ़ थाना की ताबड़तोड़ कार्रवाई (Fake DSP Arrest M)

Sagar Fake DSP Arrest:  जांच में सामने आया कि आरोपी पुलिस जैसी वर्दी पहनकर और नई बिना नंबर की बोलेरो में घूमकर लोगों पर प्रभाव डालते थे। बातचीत के दौरान वे विभागीय प्रक्रिया और पदस्थापना का हवाला देकर भरोसा जीतने की कोशिश करते थे। पुलिस ने शिवम चतुर्वेदी (नकली DSP), निवासी सागर, राजकुमार ठाकुर (नकली आरक्षक) और सतीश सिंह ठाकुर (नकली आरक्षक), दोनों निवासी बरही, जिला जबलपुर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बता दें कि इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी यही नकली DSP शिवम चतुर्वेदी ग्वालियर क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा था। उस समय वह नकली टीआई के भेष में अपने चार साथियों के साथ हाईवे पर वाहन चेकिंग कर वसूली की फिराक में था। लेकिन उससे पहले ही गैंग का पर्दाफाश हो गया था। सागर में भी ठगी के रुपये ले पाते, उससे पहले ही असली पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। फिलहाल सागर पुलिस ने जनता से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी तरह के प्रलोभन या पैसों की मांग से सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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"सागर फर्जी DSP मामला" क्या है?

इस मामले में एक युवक खुद को DSP बताकर लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांग रहा था। पुलिस ने उसे और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया है।

"फर्जी पुलिस अधिकारी ठगी" से कैसे बचें?

नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और केवल आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा करें।

"शिवम चतुर्वेदी नकली DSP" पहले कब पकड़ा गया था?

अक्टूबर 2025 में वह ग्वालियर क्राइम ब्रांच द्वारा नकली टीआई बनकर वसूली की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था।