सामूहिक प्रयासों की बदौलत 2047 से बहुत पहले ही जड़ से मिट जाएगा सिकल सेल रोग : राष्ट्रपति मुर्मू

सामूहिक प्रयासों की बदौलत 2047 से बहुत पहले ही जड़ से मिट जाएगा सिकल सेल रोग : राष्ट्रपति मुर्मू

सामूहिक प्रयासों की बदौलत 2047 से बहुत पहले ही जड़ से मिट जाएगा सिकल सेल रोग : राष्ट्रपति मुर्मू
Modified Date: June 19, 2026 / 11:48 am IST
Published Date: June 19, 2026 11:48 am IST

ओंकारेश्वर (मध्यप्रदेश), 19 जून (भाषा) खासकर आदिवासी समुदायों में सिकल सेल रोग के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और इसके उन्मूलन के लिए मिले-जुले प्रयासों की जरूरत पर जोर देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को भरोसा जताया कि आनुवंशिक रक्त विकार से जुड़ी यह बीमारी वर्ष 2047 के लक्ष्य से बहुत पहले ही देश में जड़ से मिटा दी जाएगी।

सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें लाल रक्त कणिकाएं सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिए (सिकल) जैसी हो जाती हैं। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होता है और उसे दर्द, एनीमिया, संक्रमण तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

मुर्मू, विश्व सिकल सेल दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। इस मौके पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की सामूहिक शक्ति और सक्रियता के बूते हम 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल रोग के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में अवश्य सफल होंगे।’’

मुर्मू ने कहा कि अध्ययनों से पता चला है कि देश के जनजातीय समुदायों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मैं इस मंच से सभी राज्यों के अधिकारियों और सरकारों से अनुरोध करना चाहती हूं कि इस रोग को सहजता से नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी फैलता है। इसे जड़ से मिटाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। इसका इलाज संभव है। यह रोग खत्म हो सकता है। ऐसा दावा सामने आया है।’

मध्यप्रदेश और ओडिशा देश के उन राज्यों में शुमार हैं जहां आदिवासी आबादी में सिकल सेल रोग का प्रसार सबसे अधिक है।

विश्व सिकल सेल दिवस हर वर्ष 19 जून को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच व उपचार को प्रोत्साहित करना और प्रभावित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

भाषा हर्ष

मनीषा

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