Ujjain Shahi Masjid Controversy/Image Credit: IBC24
Ujjain Shahi Masjid Controversy: भोपाल: उज्जैन की शाही मस्ज़िद का एक हिस्सा सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ी करने में तोड़ने को लेकर दिन भर बवाल होता रहा। शहर क़ाज़ी से लेकर कई मुस्लिम संगठन लगातार अपील करते रहे कि उन्होंने ख़ुद इसकी इज़ाजत दी है, लेकिन कुछ लोग अफ़वाह फैलाने में भी पीछे नहीं रहे। विरोध के ऐसे स्वर खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन के समय भी बने थे। तब भी लोगों की भावनाएं ऐसे ही उफ़ान पर थीं। हालांकि जल्द ही स्थिति पूरी तरह काबू में आ गई और मुस्लिम संगठनों ने ख़ुद ही मस्ज़िद के प्रभाविक हिस्से को तोड़ना शुरू कर दिया।
उज्जैन में जिस सड़क को चौड़ा किया जा रहा है उसमें तकरीबन 17 धार्मिक स्थल हैं, जो अलग अलग धर्मों के मानने वालों के हैं। इसी सड़क पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का पुश्तैनी मकान भी है और उसका भी कुछ हिस्सा टूटेगा। ख़ुद सीएम ने रविवार को इसकी शुरुआत की। (Ujjain Shahi Masjid Controversy) इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि ऐसी कार्यवाही के दौरान प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है। कलेक्टर कह रहे हैं कि किसी भी अफ़वाह पर लोगों को ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है।
Ujjain Shahi Masjid Controversy: जब किसी भी धर्म के आस्था स्थल पर कोई चोट पहुंचती है तो लोगों की भावनाएं उबलना सामान्य सी बात है, लेकिन सवाल है नेताओं की बयानबाज़ियों का..सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर AIMIM के नेता इसे हवा देने क्यों कूदे? हनुमान मंदिर को लेकर भी कुछ नेता ऐसे ही सक्रिय हुए थे। ज़ाहिर है कि इसके पीछे उनकी आस्था कम सियासत ज्यादा होती है।
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