Kali Nand Giri Digambar Aghori Mata : शरीर पर चिता की राख.. कार में रखती हैं नरमुंड! 27 साल की उम्र में ही बन गई महामंडलेश्वर, जानिए कौन है 18 भाषाओं की जानकार अघोरी माता?

उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की बैठक के दौरान 27 वर्षीय काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर बनने के कारण चर्चा में हैं। उनका अघोरी स्वरूप, तंत्र साधना और जीवनशैली लोगों का ध्यान खींच रही है।

Kali Nand Giri Digambar Aghori Mata : शरीर पर चिता की राख.. कार में रखती हैं नरमुंड! 27 साल की उम्र में ही बन गई महामंडलेश्वर, जानिए कौन है 18 भाषाओं की जानकार अघोरी माता?

Kali Nand Giri Digambar Aghori Mata / Image Source : IBC24

Modified Date: March 16, 2026 / 05:15 pm IST
Published Date: March 16, 2026 5:11 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 27 वर्षीय काली नंद गिरी सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर बनीं।
  • चक्रतीर्थ श्मशान घाट में जलती चिताओं के बीच की अघोर साधना।
  • 18 भाषाओं का ज्ञान और सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स का दावा।

उज्जैन : Kali Nand Giri Digambar Aghori Mata मध्य प्रदेश के उज्जैन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की बैठक में चार महामंडलेश्वरों का पट्टा अभिषेक किया गया। इनमें 27 वर्षीय काली नंद गिरी ‘दिगंबर अघोरी माता’ सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर बनने के कारण चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। शरीर पर चिता की राख, तन पर काला वस्त्र, नाक में नथनी और खुली जटाओं के साथ उनका स्वरूप लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। वे अपने साथ कई नरमुंड (मानव खोपड़ियां) रखकर कार से यात्रा करती हैं। आपको बता दें कि कार्यक्रम उज्जैन के शिवांजलि गार्डन में दो दिन तक चला, जिसमें देशभर से किन्नर संत और साधु-संत शामिल हुए थे। कार्यक्रम के बाद काली नंद गिरी देर रात शहर के चक्रतीर्थ श्मशान घाट पहुंचीं, जहां उन्होंने जलती चिताओं के बीच अघोर साधना की। साधना के करीब दो घंटे तक बाद उन्होंने अपने जीवन के बारे में कुछ बातें साझा कीं।

Kinner Akhada Ujjain छह वर्ष से शुरू कर दी थी तंत्र साधना

तेलंगाना के मंचेरियल जिले की रहने वाली काली नंद गिरी ने बताया कि उन्होंने बचपन में ही माता-पिता को छोड़कर सन्यास का मार्ग चुन लिया था। लगभग छह वर्ष की उम्र से ही तंत्र साधना सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि पहले जब वे नग्न अवस्था में घूमती थीं और मेकअप करती थीं तो लोग उनका मजाक उड़ाते और अपशब्द कहते थे। इन परिस्थितियों से परेशान होकर वे असम स्थित कामाख्या मंदिर पहुंचीं, जहां उन्हें गुरु मिले और छह वर्षों तक तंत्र साधना की शिक्षा दी। इसके बाद 12 वर्ष की उम्र में वे काशी चली गईं, जहां एक संत ने उनकी मुलाकात किन्नर अखाड़े की सती नंद गिरी माता से करवाई। बाद में उनकी मुलाकात अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से हुई, जिनके आशीर्वाद से वे किन्नर अखाड़े से जुड़ गईं।

Who is Kali Nand Giri श्मशान और कार ही है निवास

काली नंद गिरी का कहना है कि पिछले करीब 18 वर्षों से वे देश-विदेश में भ्रमण कर रही हैं। उनका स्थायी आश्रम नहीं है और अब तक उनका निवास श्मशान घाट और उनकी कार ही रही है। हालांकि महामंडलेश्वर बनने के बाद उन्होंने उज्जैन में आश्रम बनाने की इच्छा जताई है।

18 भाषाओं का ज्ञान होने का दावा

काली नंद गिरी का दावा है कि वे औपचारिक रूप से कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन देश-विदेश की यात्राओं के दौरान उन्होंने कई भाषाएं सीख लीं। उनके अनुसार उन्हें अंग्रेजी सहित लगभग 18 भाषाओं का ज्ञान है, जिनमें हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, मलयालम, गुजराती, ओड़िया, पंजाबी, असमिया और मराठी समेत अन्य भाषाएं शामिल हैं।

सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स

काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। उनका दावा है कि उनके दो सोशल मीडिया अकाउंट पर मिलाकर करीब 60 लाख फॉलोअर्स हैं। वे रोज तंत्र साधना और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़े वीडियो साझा करती हैं, जिन्हें लाखों लोग देखते हैं। उनकी कार भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है। कार के बोनट पर मां काली का बड़ा चित्र, त्रिशूल और नरमुंड के चित्र बने हुए हैं। वहीं कार के अंदर भी कई मानव खोपड़ियां रखी होने का दावा किया जाता है, जिन्हें वह तांत्रिक साधना से सिद्ध बताती हैं।

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लेखक के बारे में

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