Reported By: Indresh Suryavanshi
,Ujjain Silver Foil Ban Initiative / Image Source ; X
उज्जैन: Ujjain Silver Foil Ban Initiative मिठाइयों पर लगाए जाने वाले चांदी के वर्क के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की पहल अब उज्जैन से शुरू होगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग की सलाहकार समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिठाई विक्रेताओं और कैटरिंग व्यवसायियों की बैठक आयोजित कर उन्हें खाद्य गुणवत्ता और चांदी वर्क के संभावित दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाए। बुधवार को प्रशासनिक संकुल में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर ने कहा कि बाजार में उपलब्ध चांदी के वर्क की शुद्धता को लेकर कई तरह की आशंकाएं रहती हैं।
नकली या मिलावटी वर्क स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में मिठाइयों में चांदी वर्क के उपयोग को न्यूनतम करते हुए भविष्य में इसे पूरी तरह बंद करने की दिशा में प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि उज्जैन से इस संबंध में एक सकारात्मक पहल की जानी चाहिए, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके। त्योहारों का इंतजार नहीं, लगातार लिए जाएं नमूने कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य पदार्थों के नमूने लेने के लिए त्योहारों का इंतजार न किया जाए। वर्षभर नियमित रूप से जांच और सैंपलिंग की कार्रवाई जारी रखी जाए, ताकि बाजार में नकली, मिलावटी या अमानक खाद्य सामग्री की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
Food Safety Department Sampling Ujjain उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर स्कूलों में भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पौष्टिक भोजन और स्वस्थ खानपान संबंधी जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। लक्ष्य से अधिक लिए गए खाद्य नमूने बैठक में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंतदत्त शर्मा ने बताया कि विभाग ने 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक 420 नमूने लेने के लक्ष्य के विरुद्ध 513 नमूने लिए, जो निर्धारित लक्ष्य का 122 प्रतिशत है। वहीं 1 अप्रैल 2026 से 20 जून 2026 तक की अवधि में भी लक्ष्य से अधिक 90 खाद्य नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। ऐसे पहचानें शुद्ध और मिलावटी चांदी का वर्क विशेषज्ञों के अनुसार आम लोग घर पर ही कुछ आसान तरीकों से चांदी के वर्क की जांच कर सकते हैं।
Ujjain Silver Foil Ban Initiative चांदी के वर्क को अंगुलियों के बीच रखकर रगड़ें। यदि वर्क पूरी तरह घुलकर अंगुलियों में समा जाता है तो वह शुद्ध चांदी हो सकती है। यदि वह टूटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाए या ग्रे अथवा काले रंग के निशान छोड़े तो उसमें एल्युमिनियम या अन्य धातुओं की मिलावट हो सकती है। जलाने का परीक्षण वर्क के छोटे टुकड़े को आग के संपर्क में लाएं। शुद्ध चांदी जलने के बाद सिकुड़कर छोटी सफेद गेंद जैसी बन जाती है, जबकि एल्युमिनियम मिश्रित वर्क काला पड़ सकता है और राख जैसा दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में मिलने वाले कुछ सस्ते चांदी वर्क में एल्युमिनियम, लेड (शीशा) और कैडमियम जैसी भारी धातुओं की मिलावट पाई जाती है। इनका लगातार सेवन शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। मिलावटी वर्क के सेवन से लीवर और किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा पेट दर्द, संक्रमण, अल्सर और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। लंबे समय तक भारी धातुओं के संपर्क में रहने से नर्वस सिस्टम प्रभावित होने और याददाश्त पर असर पड़ने का खतरा भी बना रहता है। कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जागरूकता और निगरानी दोनों स्तरों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।