विदेश में साइबर धोखाधड़ी के लिए युवाओं की तस्करी के आरोपी की जमानत खारिज
विदेश में साइबर धोखाधड़ी के लिए युवाओं की तस्करी के आरोपी की जमानत खारिज
मुंबई, 13 मार्च (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने विदेश में नौकरी दिलाने के बहाने शिक्षित युवाओं की तस्करी करने और फिर उन्हें साइबर धोखाधड़ी की गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करने के आरोपी एक व्यक्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है।
न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी और एस. सी. चंदक की पीठ ने इस ओर ध्यान दिया कि आरोपी जेरी फिलिप्स जैकब के खिलाफ प्रथम दृष्टया शिक्षित बेरोजगार युवाओं को विदेशी कंपनियों में वैध रोजगार दिलाने के बहाने भारत से तस्करी करने का मामला बनता है।
अदालत ने कहा कि मानव तस्करी के बाद पीड़ितों को अन्य देशों के लोगों को धोखा देकर अवैध लाभ कमाने के मकसद से मजबूर किया गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘यह अपराध गंभीर प्रकृति का है। ऐसा प्रतीत होता है कि अगर अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह फरार हो सकता है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। इसलिए, हम उसे जमानत देने के इच्छुक नहीं हैं।’’
यह आदेश 10 मार्च को दिया गया, जिसकी एक प्रति शुक्रवार को उपलब्ध हुई।
मार्च 2024 में गिरफ्तार किए गए जैकब ने अपने आवेदन में दावा किया कि पीड़ितों को रोजगार की प्रकृति के बारे में सूचित किया गया था और उन्हें औपचारिक रोजगार अनुबंध प्रदान किए गए थे।
अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि यह नहीं कहा जा सकता कि वह मानव तस्करी के शिकार लोगों को बहलाने-फुसलाने, उन्हें गुलामी के अधीन करने में शामिल था। उसने दावा किया कि उस पर गुलामी का आरोप लगाना गैरकानूनी होगा।
हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब पीड़ितों ने उस काम की प्रकृति के बारे में पूछताछ की जिसके लिए उन्हें विदेश जाने के लिए कहा गया था, तो उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि वे वैध रोजगार में शामिल होंगे।
भाषा यासिर नरेश
नरेश

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