अमरावती अस्पताल अग्निकांड: विपक्ष ने अस्पतालों के अग्नि सुरक्षा ऑडिट की मांग की

अमरावती अस्पताल अग्निकांड: विपक्ष ने अस्पतालों के अग्नि सुरक्षा ऑडिट की मांग की

अमरावती अस्पताल अग्निकांड: विपक्ष ने अस्पतालों के अग्नि सुरक्षा ऑडिट की मांग की
Modified Date: August 24, 2026 / 02:49 pm IST
Published Date: August 24, 2026 2:49 pm IST

मुंबई, 24 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाशराव आबिटकर ने सोमवार को कहा कि अमरावती के एक अस्पताल में आग लगने के बाद चिकित्सा कर्मचारियों ने शिशुओं को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, वहीं विपक्ष ने घटना के लिए जवाबदेही तय किए जाने और राज्यभर के अस्पतालों का अग्नि सुरक्षा ऑडिट कराए जाने की मांग की।

विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता एवं राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दावा किया कि 2021 में भंडारा के एक अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद गठित समिति की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। उस घटना में 10 शिशुओं की मौत हुई थी।

उन्होंने राज्यभर के अस्पतालों का तत्काल अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराए जाने की मांग की।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने घटना के बाद अस्पताल का दौरा किया और इस दावे पर सवाल उठाया कि आग वेंटिलेटर में विस्फोट के कारण लगी।

अधिकारियों के अनुसार, अमरावती शहर के जिला महिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में सोमवार तड़के आग लगने से तीन नवजात शिशुओं की मौत हो गई तथा 36 अन्य शिशुओं को सुरक्षित बचा लिया गया।

ठाकुर ने कहा कि अस्पताल में पहले भी इसी तरह की घटना हो चुकी है और उन्होंने उपकरणों तथा विद्युत कनेक्शन की सुरक्षा पर सवाल उठाए। उन्होंने वेंटिलेटर की आपूर्ति करने वाली कंपनी के बारे में भी जानकारी मांगी और घटना के लिए जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य ढांचे और सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान देने में विफल रही है। ठाकुर ने अस्पताल में चिकित्सकों और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई।

हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने कहा कि अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्चों को बचाने की पूरी कोशिश की।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘अमरावती के एक अस्पताल में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में हमारे तीन बच्चों की मौत हो गई। यह बेहद दुखद घटना है। हमारे कर्मचारियों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा और बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन दुर्भाग्य से वे सफल नहीं हो सके।’’

देशमुख ने कहा कि 2021 में भंडारा अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन समिति की सिफारिशें सरकारी विभागों में धूल फांक रही हैं। अगर राज्य सरकार ने उन सिफारिशों को लागू किया होता तो अमरावती की घटना नहीं होती।’’

देशमुख ने सरकार से समिति की सिफारिशों को जल्द लागू करने की मांग की।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी पार्टी के नेता एवं अमरावती के विधायक रवि राणा ने कहा कि करीब तीन साल पहले भी अस्पताल में इसी तरह आग लगी थी और उन्होंने सवाल किया कि अस्पताल को नयी इमारत में स्थानांतरित किए जाने के बावजूद ऐसी घटना दोबारा कैसे हुई।

राणा ने चिकित्सकों, कर्मचारियों एवं व्यवस्था की ओर से लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि जवाबदेही तय करने के लिए जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वालों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने शिशुओं की मौत को ‘‘हृदयविदारक और आक्रोश पैदा करने वाली’’ घटना बताया और कहा कि जिन नवजात शिशुओं को बचाने के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनकी मौत स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सपकाल ने उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा महाराष्ट्र के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों का अग्नि सुरक्षा एवं चिकित्सा उपकरण संबंधी सुरक्षा ऑडिट तत्काल कराने की मांग की।

कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि इन मौतों से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद आग लगी।

वडेट्टीवार ने कहा कि सरकार को केवल जांच कराने के बजाय घटना के लिए जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के सभी सरकारी अस्पतालों का तत्काल अग्नि सुरक्षा एवं चिकित्सा उपकरण ऑडिट कराने की भी मांग की।

राज्य के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राज्य के सभी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और जरूरी कदम उठाए जाएंगे।’’

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और उन्होंने इस घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

पाटिल ने कहा कि मृत तीनों बच्चों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी, जबकि घायल बच्चों का इलाज सरकारी खर्च पर कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह राहत की बात है कि 36 बच्चों को अस्पताल से सुरक्षित निकाल लिया गया।

शिवसेना के नेता एवं सांसद श्रीकांत शिंदे ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि घायल बच्चों का सुरक्षित स्थान पर इलाज किया जा रहा है। उन्होंने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश


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