मुंबई, 29 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने 2021 के एंटीलिया बम धमकी और मनसुख हिरेन हत्या मामले में पूर्व पुलिसकर्मी सचिन वाजे को मंगलवार को जमानत दे दी।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवाद का प्रथम दृष्टया मामला साबित करने में नाकाम रहा।
विशेष सत्र न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह माना जा सके कि अंबानी परिवार को किसी भी तरह से “डराया-धमकाया” गया था।
दक्षिण मुंबई में 25 फरवरी 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ के पास एक एसयूवी में विस्फोटकों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री मिली थी। इस एसयूवी के मालिक, व्यवसायी मनसुख हिरेन, पांच मार्च, 2021 को पड़ोसी ठाणे की एक खाड़ी में मृत पाए गए थे।
अदालत ने एनआईए द्वारा सख्त यूएपीए कानून लागू करने पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि एजेंसी अंबानी परिवार के किसी भी सदस्य का कोई बयान दर्ज करने में नाकाम रही जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें डराया-धमकाया गया था।
इसमें कहा गया है, “रिकॉर्ड पर ऐसी कोई भी बात नहीं है जिससे यह अंदाजा भी लगाया जा सके कि अंबानी परिवार या उनमें से किसी को भी कभी किसी तरह से डराया-धमकाया गया हो।”
अदालत ने कहा कि इसके अलावा अंबानी के घर के पास खड़ी एसयूवी में मिली जिलेटिन की छड़ों में डेटोनेटर नहीं थे, जिससे वे धमाका करने के मकसद से बेकार थीं और यूएपीए की धारा 15 के तहत ‘आतंकवादी कृत्य’ की परिभाषा के लिए जरूरी “साधन” की श्रेणी में नहीं आती थीं।
कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में अदालत ने कहा कि भले ही यह हत्या का मामला था, लेकिन यह किसी आतंकवादी घटना का सीधा नतीजा नहीं था।
अदालत ने कहा कि यह भारतीय दंड संहिता (भादंवि) की धारा 302 (हत्या) के तहत एक स्वतंत्र अपराध है, जिस पर यूएपीए के कड़े जमानत नियमों का असर नहीं पड़ता।
अदालत ने वाजे की जमानत अर्जी मंजूर कर ली और उन्हें एक लाख रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार के साथ रिहा करने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष ने वाजे और अन्य लोगों पर फरवरी और मार्च 2021 के बीच एक “आतंकवादी गिरोह” बनाने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया है।
भाषा प्रशांत नरेश
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