भिवंडी खाद्य विषाक्तता: 79 लोग अब भी अस्पताल में भर्ती, एफडीए ने भोजनालयों पर कार्रवाई शुरू की
भिवंडी खाद्य विषाक्तता: 79 लोग अब भी अस्पताल में भर्ती, एफडीए ने भोजनालयों पर कार्रवाई शुरू की
ठाणे, 21 जून (भाषा) महाराष्ट्र के भिवंडी शहर में पांच दिन पहले हुए खाद्य विषाक्तता के गंभीर मामले के बाद अब भी 79 लोग स्थानीय अस्पताल में उपचाराधीन हैं। एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी के अनुसार, सभी प्रभावित लोगों ने एक लोकप्रिय भोजनालय में नाश्ता किया था जिसके बाद उन्हें खाद्य विषाक्तता की शिकायत हुई थी।
घटना के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने भोजनालयों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की और शहर में एक प्रमुख भोजनालय को सील कर दिया।
पुलिस के अनुसार, एक स्थानीय प्रतिष्ठान में 17 जून को खाद्य पदार्थ खाने वाले कई ग्राहकों को अगले दिन पेट दर्द और दस्त की शिकायत हुई जिसके बाद उन्हें अस्पतालों में ले जाना पड़ा।
इंदिरा गांधी मेमोरियल (आईजीएम) अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. माधवी एस. पंडारे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि घटना के बाद से अस्पताल में 124 मरीजों को भर्ती कराया गया था। उन्होंने कहा कि इनमें से 45 मरीजों को छुट्टी दे दी गई है जबकि 79 मरीज फिलहाल चिकित्सकों की देखरेख में हैं।
एफडीए के सहायक आयुक्त (भिवंडी) संतोष शिरोसिया ने कहा कि इस घटना के बाद विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों की गहन जांच की गई।
उन्होंने कहा, ‘नियमों के उल्लंघन के लिए कम से कम एक भोजनालय को सील किया गया है और त्रुटिपूर्ण घोषणाओं के लिए एक अन्य के खिलाफ कार्रवाई की गई है। संबंधित शोरमा दुकान से खाद्य नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं और उस प्रतिष्ठान को भी सील कर दिया गया है।’
अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच में एक असामान्य पैटर्न सामने आया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह दुकान शाम चार बजे से रात दो बजे तक खुलती है, लेकिन देखा गया कि रात 10 बजे के बाद शोरमा खाने वाले लोग ही बीमार पड़े। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि गड़बड़ी कहां हुई है। हम भोजन तैयार करने की प्रक्रिया की भी जांच कर रहे हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा कि मौसमी परिस्थितियों के कारण मई-जून के दौरान खाद्य विषाक्तता के मामले आम तौर पर बढ़ जाते हैं।
स्थानीय विधायक रईस शेख ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि शनिवार तक मरीजों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। उन्होंने ऐसी दुकानों के अनुपयुक्त नियमन को गंभीर चिंता का विषय बताया है।
भाषा प्रचेता नरेश
नरेश

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