किसी त्योहार के नहीं, बल्कि प्रदूषण के खिलाफ हैं : मुंबई उच्च न्यायालय

किसी त्योहार के नहीं, बल्कि प्रदूषण के खिलाफ हैं : मुंबई उच्च न्यायालय

किसी त्योहार के नहीं, बल्कि प्रदूषण के खिलाफ हैं : मुंबई उच्च न्यायालय
Modified Date: September 21, 2026 / 09:38 pm IST
Published Date: September 21, 2026 9:38 pm IST

मुंबई, 21 सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने त्योहारी सीजन के बीच पूरे महाराष्ट्र में गंभीर ध्वनि प्रदूषण फैलने पर सोमवार को स्वतः संज्ञान लिया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि वह किसी धर्म या त्योहार के खिलाफ नहीं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ है।

न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने त्योहारों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान डीजे, ‘साउंड सिस्टम’ और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की।

अदालत ने रहा, “हम किसी धर्म या त्योहार के विरोधी नहीं हैं। हालांकि, त्योहार मनाते समय हर किसी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दूसरों को असुविधा न हो।”

मामले की सुनवाई मंगलवार के लिए तय करते हुए, उच्च न्यायालय ने राज्य के महाधिवक्ता मिलिंद साठे को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों की जानकारी देने और यह बताने का निर्देश दिया कि क्या मूर्ति विसर्जन की शोभायात्राओं के दौरान इनका क्रियान्वयन किया जा रहा है या नहीं।

अदालत ने यह बताने के लिए भी कहा कि इन नियमों का पालन कैसे किया जा रहा है, क्या स्वीकार्य ध्वनि स्तर के संबंध में दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं और क्या उन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।

अदालत ने कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के बारे में भी पूछा।

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में