आईआईटी छात्र आत्महत्या: मंत्री ने कहा- घटना को जातिगत नजरिये से देखना गलत होगा
आईआईटी छात्र आत्महत्या: मंत्री ने कहा- घटना को जातिगत नजरिये से देखना गलत होगा
मुंबई, 21 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम ने सोमवार को कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या को जातिगत नजरिये से देखना गलत होगा।
कदम ने यह भी कहा कि मृतक के परिजनों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उचित निर्णय लेंगे।
ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक द्वितीय वर्ष का छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे (22) 18 सितंबर की शाम आईआईटी मुंबई के पवई परिसर स्थित छात्रावास के कमरे में पंखे से लटका मिला था।
इस घटना के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया और छात्र के अभिभावकों की शिकायत के आधार पर कथित जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न को लेकर एक प्रोफेसर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
गृह राज्य मंत्री कदम ने कहा कि घटना की पुलिस जांच में छात्र पर दबाव डालने के आरोप समेत सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा इस घटना का राजनीतिकरण किया जाना महाराष्ट्र की संस्कृति नहीं है।
कदम ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘एक छात्र ने अपनी जान गंवाई है और हम इसकी गंभीरता को समझते हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने निर्देश दिया है कि यदि छात्र के साथ कुछ गलत हुआ है या उस पर दबाव डाला गया था, तो इस पहलू से भी जांच की जाए। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।’’
मंत्री ने कहा, ‘‘किसी छात्र को जातिगत नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। हमने एक इंसानी जान गंवाई है और हम इसे उसी नजरिये से देखेंगे। इसे जातिगत नजरिये से देखना गलत होगा। एक छात्र की जान गई है और उसके परिवार को सच्चाई जानने का अधिकार है।’’
परिवार की ओर से मामले की सीबीआई जांच की मांग के बारे में पूछे जाने पर कदम ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस, जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं, इस पर उचित निर्णय लेंगे।
वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) ने आईआईटी मुंबई के छात्र की आत्महत्या का उल्लेख करते हुए सोमवार को दावा किया कि ‘‘एक बड़ी समस्या’’ मौजूद है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। पार्टी ने कहा कि परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने मात्र से कोई व्यक्ति आत्महत्या करने के कगार पर नहीं पहुंच सकता।
पार्टी के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि देश में किसानों की तुलना में छात्रों की आत्महत्या की संख्या अधिक है और यह ‘‘राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य आपात स्थिति’’ है।
राकांपा (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता अनीश गावंडे ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘पिछले 20 वर्षों में आईआईटी में 117 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है।’’ उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला दिया।
उन्होंने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2024 में 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की।
गावंडे ने कहा कि इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत घटनाओं या परीक्षा संबंधी अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए और आत्महत्या रोकथाम विशेषज्ञों की राय को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
आईआईटी मुंबई के छात्रावासों में सुरक्षा उपाय के तौर पर छत वाले पंखों को दीवार पर लगाए जाने वाले पंखों से बदलने संबंधी खबरों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘क्या आईआईटी मुंबई को वास्तव में लगता है कि छत वाले पंखों की जगह दीवार वाले पंखे लगाने से देशभर के आईआईटी में छात्रों की आत्महत्या की समस्या हल हो जाएगी?’’
भाषा अमित नेत्रपाल
नेत्रपाल

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