बाधाएं तोड़ बचा रहे हैं जिंदगियां: कोल्हापुर में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग बने आपात स्थिति के मददगार

बाधाएं तोड़ बचा रहे हैं जिंदगियां: कोल्हापुर में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग बने आपात स्थिति के मददगार

बाधाएं तोड़ बचा रहे हैं जिंदगियां: कोल्हापुर में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग बने आपात स्थिति के मददगार
Modified Date: September 20, 2026 / 10:09 am IST
Published Date: September 20, 2026 10:09 am IST

(संदीप कोल्हटकर)

कोल्हापुर, 20 सितंबर (भाषा) कोल्हापुर की गलियों में धीमे धीमे बदलाव हो रहा है, जहां ट्रांसजेंडर लोगों का समूह लोगों की जान बचाने के लिए आपात स्थिति में पहले मददगार के तौर पर उभर कर सामने आ रहा है।

ट्रांसजेंडर लोगों का ये समूह लंबे समय से भीख मांगने और समाज से अलग-थलग रहने को मजबूर था लेकिन अब वे आपातकालीन स्थिति में सबसे पहले मदद करने वाले के तौर पर आगे आ रहे हैं। वे अपनी ताकत और देखभाल की भावना का इस्तेमाल करके आपात स्थितियों में लोगों की जान बचा रहे हैं और सम्मानजनक जीवन पा रहे हैं।

महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 15 ट्रांसजेंडर लोगों को बाढ़ प्रबंधन, खोज और बचाव कार्य, प्राथमिक चिकित्सा और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) का प्रशिक्षण दिया है। अधिकारियों का दावा है कि यह देश में अपनी तरह की पहली पहल है।

पहले समूह ने मई में तीन दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसमें आपदा के समय की कार्रवाई के व्यावहारिक पहलुओं को शामिल किया गया, जैसे कि हवा से भरी जाने वाली बचाव नौकाओं को चलाना, पानी से लोगों को बचाना और प्राथमिक चिकित्सा एवं सीपीआर देना। इसके बाद स्वयंसेवकों ने और भी अभ्यास सत्रों में हिस्सा लिया है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रसाद सांकपाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह विचार कोविड-19 महामारी के दौरान प्रशासन और ट्रांसजेंडर समुदाय के बीच हुई बातचीत से सामने आया था।

उन्होंने कहा, ‘‘कोविड-19 के दौरान वे बेहद मुश्किल स्थिति में थे। हमने उन्हें राशन, पैकेट बंद भोजन और कुछ मामलों में स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी। इसी दौरान हमारा उनसे करीबी संपर्क हुआ।’’

सांकपाल ने बताया कि उन्होंने 2023 में आपदा प्रबंधन में इस समुदाय के सदस्यों को शामिल करने की संभावना पर विचार करना शुरू किया था लेकिन स्वीकार्यता मिलने में समय लगा।

अधिकारी ने कहा, ‘‘उनके (ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के) मन में थोड़ी हिचकिचाहट थी कि क्या वे यह कर पाएंगे। मैंने उनसे बातचीत जारी रखी और उन्हें हमारे ‘आपदा मित्र’ और ‘आपदा सखी’ स्वयंसेवक का उदाहरण दिया।’’

आखिरकार, मयूरी अल्वेकर के नेतृत्व वाले ट्रांस लोगों के संगठन ‘मैत्री’ की मदद से यह प्रशिक्षण शुरू हुआ।

कोल्हापुर में बाढ़ का खतरा तो रहता ही है, साथ ही यहां ज्योतिबा मंदिर और महालक्ष्मी मंदिर जैसी स्थानों पर लोगों की भारी भीड़ भी जुटती है। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाएं और अन्य आपातकालीन स्थितियां भी आती रहती हैं।

सांकपाल ने कहा कि ट्रांस स्वयंसेवकों को धीरे-धीरे समुदाय-आधारित आपदा राहत गतिविधियों में शामिल किया जाएगा।

भाषा

सुरभि रंजन

रंजन


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