मराठी भाषा के अनिवार्य कामकाजी ज्ञान संबंधी नियम को कैब चालकों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी
मराठी भाषा के अनिवार्य कामकाजी ज्ञान संबंधी नियम को कैब चालकों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी
मुंबई, 25 अगस्त (भाषा) मुंबई के चार कैब चालकों ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय में महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी, जिसके जरिये ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-आधारित कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना अनिवार्य बनाया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने सरकार के फैसले को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
याचिकाकर्ताओं ने वकील विवेक शुक्ला के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है, जिसमें यह भी कहा गया कि 12 अगस्त की सरकारी अधिसूचना से लाखों ‘गरीब और प्रवासी’ चालकों की आजीविका पर खतरा पैदा हो गया है। याचिकाकर्ताओं ने इसके अमल पर रोक लगाने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं – मोहम्मद कासिम अहमद, मोहम्मद तौसीफ़ शेख़, सियाद अहमद और सादिक़ नासिर अली ख़ान – का दावा है कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता) और 21 (जीवन का अधिकार) के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
उन्होंने यह भी दावा किया है कि यह नियम मोटर वाहन अधिनियम के भी खिलाफ है, क्योंकि इस कानून में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भाषा की शर्त नहीं रखी गई है।
इस मामले में तुरंत राहत पाने के लिए बृहस्पतिवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के सामने उल्लेख किये जाने की संभावना है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘मोटर वाहन अधिनियम राज्य सरकार को चालक के लिए किसी भाषा की कामकाजी जानकारी को योग्यता, बैज या परमिट की शर्त के तौर पर तय करने का कोई अधिकार नहीं देता है और न ही इस आधार पर बैज को निलंबित या रद्द करने का कोई अधिकार देता है।’’
इसमें यह भी कहा गया है कि इस नियम के लागू होने से याचिकाकर्ताओं समेत लाखों गरीब और प्रवासी चालकों के बैज निलंबित होने और परमिट रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी।
याचिका में उच्च न्यायालय से फैसले के अमल पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से पूरे राज्य में एक अभियान शुरू किया है, ताकि गैर-मराठी टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों की मराठी भाषा की जानकारी की जांच की जा सके।
पिछले हफ़्ते, राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा कि महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने के लिए मराठी भाषा की व्यावहारिक जानकारी की ज़रूरत 1989 से ही थी, लेकिन इसे सख्ती से लागू नहीं किया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का किसी की रोज़ी-रोटी छीनने का कोई इरादा नहीं है, वह बस इतना चाहती है कि महाराष्ट्र में काम करने वाले लोग राज्य की भाषा और संस्कृति को सीखें और उनका सम्मान करें।
हालांकि, राज्य सरकार के मराठी भाषा की जानकारी से जुड़े अभियान के तहत भारी जुर्माने की अफ़वाहों के कारण ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों में फैली घबराहट सोमवार को मुंबई के कुछ हिस्सों में सड़क पर विरोध-प्रदर्शन में बदल गई, जिससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दखल देना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की इस मुहिम का मकसद ड्राइवरों को भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं, बल्कि यह पक्का करना था कि वे अपने काम के लिए स्थानीय भाषा में बातचीत कर सकें।
भाषा
राजकुमार दिलीप
दिलीप

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