महाराष्ट्र में मंत्रियों के कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की ‘मौखिक’ नियुक्तियां रद्द

महाराष्ट्र में मंत्रियों के कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की ‘मौखिक’ नियुक्तियां रद्द

महाराष्ट्र में मंत्रियों के कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की ‘मौखिक’ नियुक्तियां रद्द
Modified Date: August 25, 2026 / 05:29 pm IST
Published Date: August 25, 2026 5:29 pm IST

मुंबई, 25 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्य सचिव ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रतिनियुक्ति पर, सेवा उधार आधार पर या केवल मौखिक आदेशों के जरिये मंत्रियों के कार्यालयों और राज्य के विभागों में की गई अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है।

मंगलवार को जारी एक परिपत्र में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को 10 सितंबर तक उनके मूल कार्यालयों में वापस भेज दिया जाए।

परिपत्र में कहा गया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना नियुक्तियां की जा रही थीं। इसमें बड़ी संख्या में डॉक्टर, स्टेनोग्राफर, शिक्षक और इंजीनियर समेत तकनीकी कर्मचारियों की भी नियुक्ति की गई थी। इनमें से कई के पास मंत्रालय में काम करने का प्रशिक्षण या अनुभव नहीं था, जिससे मंत्रालय के कामकाज और स्थापित प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ रहा था।

परिपत्र के अनुसार, ये नियुक्तियां मूल मंत्रिस्तरीय विभाग, अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन/सेवाएं), मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के आवश्यक अनुमोदन के बिना की गई थीं।

सरकार ने कहा कि ऐसी नियुक्तियों के कारण संबंधित विभाग और मूल कार्यालय, दोनों के लिए रिक्त पदों को भरना भी मुश्किल हो गया था।

इससे मूल विभागों के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ा और प्रशासनिक कठिनाइयां पैदा हुईं। इससे कर्मचारियों को उनके मूल विभागों में मिला प्रशिक्षण भी बेकार हो गया।

एक अन्य चिंता यह थी कि प्रतिनियुक्ति या मौखिक निर्देशों के आधार पर की गई नियुक्तियों में सत्यनिष्ठा प्रमाणपत्र, चरित्र प्रमाणपत्र, गोपनीय रिपोर्ट, विभागीय जांच और सेवा से जुड़े अन्य मामलों का सत्यापन नहीं किया जाता था।

परिपत्र में कहा गया कि ऐसा सत्यापन जरूरी है, क्योंकि मंत्रालय और मंत्रियों के कार्यालयों का काम प्रशासनिक होने के साथ-साथ अत्यंत संवेदनशील प्रकृति का होता है। इसने उन कैडरों से संबंधित सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों की संविदा अवधि बढ़ाने को भी अनुचित करार दिया है, जिन्हें अप्रचलित या ‘डाइंग कैडर’ (समाप्त होने वाले कैडर) घोषित किया जा चुका है।

नए निर्देशों के तहत कार्यालय प्रमुखों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) को 15 सितंबर तक यह पुष्टि करने वाली रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है कि जिन अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द की गई हैं, उन्होंने अपने मूल कार्यालयों में कार्यभार संभाल लिया है।

यदि कोई कर्मचारी अपने मूल कार्यालय में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है, तो संबंधित कार्यालय को उसका वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है। संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव को 20 सितंबर तक मुख्य सचिव कार्यालय में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

भाषा तान्या दिलीप

दिलीप


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