चिंताजनक संकेतकों के मद्देनजर भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता पैदा होती है : जयंत पाटिल

चिंताजनक संकेतकों के मद्देनजर भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता पैदा होती है : जयंत पाटिल

चिंताजनक संकेतकों के मद्देनजर भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता पैदा होती है : जयंत पाटिल
Modified Date: June 5, 2026 / 08:25 pm IST
Published Date: June 5, 2026 8:25 pm IST

मुंबई, पांच जून (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व वित्त मंत्री जयंत पाटिल ने शुक्रवार को भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर आशंका जताते हुए सवाल किया कि क्या देश विकास के पथ पर अग्रसर है या केंद्र सरकार द्वारा ‘अमृत काल’ को बढ़ावा दिये जाने के बावजूद मंदी की ओर बढ़ रहा है।

पाटिल ने एक बयान में माल एवं सेवाकर (जीएसटी) संग्रह में गिरावट, बढ़ती मुद्रास्फीति के अनुमानों और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)वृद्धि के पूर्व अनुमानों में संशोधन कर इसे नीचे करने सहित, चिंताजनक आर्थिक संकेतकों का हवाला दिया।

राकांपा(शप) नेता ने सवाल किया, ‘‘अमृत काल का विज्ञापन तो किया जा रहा है, लेकिन अर्थव्यवस्था वास्तव में क्या संकेत देती है?’’ उन्होंने कहा कि मई में जीएसटी संग्रह अप्रैल की तुलना में लगभग 50,000 करोड़ रुपये कम था, जो लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के बराबर है।

पाटिल ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत होने का अनुमान है, जबकि जीडीपी वृद्धि 6.9 प्रतिशत से घटकर 6.6 प्रतिशत पर पहुंचने की भविष्यवाणी की गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने जीडीपी पूर्वानुमान को अप्रैल में अनुमानित 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। बैंक ने इसके पीछे ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों के साथ-साथ पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से आपूर्ति व्यवधानों को कारण बताया, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ने की आशंका है।

पाटिल ने कहा, ‘‘जब मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो विकास की गति धीमी हो जाती है और आम नागरिकों की क्रय शक्ति घट जाती है। अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति बाजार में दिखाई देती है, न कि सरकारी विज्ञापनों में।’’

महाराष्ट्र के पूर्व वित्तमंत्री ने दावा किया कि युवाओं को रोजगार पाने में कठिनाई हो रही है, उद्योग नए निवेशों को लेकर एहतियात बरत रहे हैं और घरेलू खर्च लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, सवाल उठता है कि क्या देश विकास के पथ पर अग्रसर है या आर्थिक मंदी की ओर खतरनाक मोड़ पर पहुंच रहा है।’’

भाषा धीरज नरेश

नरेश


लेखक के बारे में