अदालत ने 37 साल पुराने हत्या प्रयास मामले में फरार दंपति को बरी किया
अदालत ने 37 साल पुराने हत्या प्रयास मामले में फरार दंपति को बरी किया
ठाणे, 27 मई (भाषा) महाराष्ट्र में ठाणे की एक अदालत ने हत्या के प्रयास के 37 साल पुराने मामले में फरार एक दंपति को बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा कि अत्यधिक विलंब के कारण अभियोजन पक्ष गवाहों का पता लगाने में असमर्थ रहा और मामले से जुड़े दस्तावेज भी इस हद तक क्षतिग्रस्त हो चुके थे कि उन्हें पढ़ा नहीं जा सकता है।
कल्याण अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी आर अष्टुरकर ने सोमवार को ललितमोहन देवेंद्रनाथ दुग्गल और उनकी पत्नी रीता ललितमोहन दुग्गल को बरी करते हुए अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जो दूर-दूर तक इस मामले में आरोपियों की संलिप्तता और सक्रिय भागीदारी का संकेत देता हो।
ठाणे जिले के उल्हासनगर में छह अप्रैल, 1989 को कचरा निपटान को लेकर हुए विवाद के बाद अपने पड़ोसी पर तेजाब से हमला करने के आरोप में दंपति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
यह मामला 1996 में जिला न्यायालय से कल्याण सत्र न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था और लगभग तीन दशकों तक लंबित रहा क्योंकि आरोपी जमानत का उल्लंघन कर फरार हो गए थे।
सत्र न्यायालय पुराने मामलों को प्राथमिकता देने के उच्च न्यायालय के निर्देशों पर यह सुनवाई कर रहा था।
विट्ठलवाड़ी पुलिस द्वारा पीड़िता सुजैन जॉर्ज माइक, उसके परिवार के सदस्यों या किसी भी स्वतंत्र गवाह का पता लगाने में विफल रहने के बाद अभियोजन पक्ष का मामला धराशायी हो गया। पूरे मुकदमे में केवल पुलिस कांस्टेबल गोपाल जयराम सावले से ही पूछताछ की गई जिसने बताया कि आरोपपत्र में नामित किसी भी व्यक्ति का पता नहीं लगाया जा सका।
अदालत ने कहा, दंपति के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उनकी उपस्थिति की उम्मीद में मामले को लटकाए रखने से कोई लाभ नहीं होगा। ‘यह एक व्यर्थ प्रयास होगा जिसका कोई परिणाम नहीं निकलेगा। इसलिए, आरोपी बरी होने के हकदार हैं।’
भाषा प्रचेता रंजन
रंजन

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