दिशा सालियान मामले में अदालत ने सीबीआई जांच के आदेश दिए; पुलिस को फटकार लगाई

दिशा सालियान मामले में अदालत ने सीबीआई जांच के आदेश दिए; पुलिस को फटकार लगाई

दिशा सालियान मामले में अदालत ने सीबीआई जांच के आदेश दिए; पुलिस को फटकार लगाई
Modified Date: September 2, 2026 / 06:26 pm IST
Published Date: September 2, 2026 6:26 pm IST

मुंबई, दो सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की प्रबंधक रहीं दिशा सालियान की मौत के मामले में बुधवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराए जाने का आदेश दिया और छह साल तक प्राथमिकी दर्ज नहीं करने पर मुंबई पुलिस को फटकार लगाई।

अदालत ने कहा कि मुंबई पुलिस की जांच ‘‘जवाब से अधिक सवाल खड़े करती है’’।

न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह राजा भोंसले की पीठ ने कहा कि किसी मामले की जांच अनिश्चित समय तक नहीं चल सकती और इस मामले में केंद्रीय एजेंसी से जांच कराया जाना आवश्यक है।

पीठ ने 44 पृष्ठ के आदेश में कहा, ‘‘इस मामले में जांच लगभग छह साल तक चली। पुलिस की जांच से जवाब मिलने के बजाय और सवाल खड़े होते हैं। इसलिए मामले में सीबीआई जांच जरूरी है।’’

इसने पुलिस की आलोचना करते हुए कहा कि उसने छह साल तक इसे सिर्फ दुर्घटनावश मौत का मामला माना और जांच में ‘‘साफ तौर पर कई कमियां’’ पाई गई हैं।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की प्रबंधक के रूप में कुछ समय तक काम करने वाली दिशा सालियान की 8 जून, 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक रिहायशी इमारत की 12वीं मंज़िल से कथित तौर पर गिरने से मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने दुर्घटनावश मौत की रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की थी।

इसके एक सप्ताह बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता भी अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे, जिससे ये अटकलें लगाई जाने लगीं कि दोनों मौतों के बीच कोई संबंध हो सकता है।

इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने राजपूत की मौत की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। एजेंसी ने अपनी ‘क्लोजर रिपोर्ट’ में कहा कि अभिनेता ने आत्महत्या की थी, लेकिन संबंधित अदालत में अभी इस रिपोर्ट पर सुनवाई होनी बाकी है।

उच्च न्यायालय ने सीबीआई से प्राथमिकी दर्ज करने और दिशा के पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करने को कहा, लेकिन यह भी साफ किया कि जांच के दौरान किसी के ख़िलाफ पर्याप्त सबूत मिलने तक किसी को भी आरोपी नहीं माना जाएगा।

सतीश सालियान ने शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि मामले की जांच करना केंद्रीय एजेंसी का काम है। ठाकरे ने सभी आरोपों से इनकार किया है।

दिशा के पिता ने 2020 में उसकी मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया था और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि उसकी राय में पुलिस के पास कथित अपराध की जांच करने का पर्याप्त मौका था, लेकिन उसने प्राथमिकी दर्ज नहीं की और न ही किसी संज्ञेय अपराध की जांच की।

इसने बुधवार को मुंबई पुलिस को आदेश दिया कि वह दिशा सालियान की मौत के मामले से जुड़ी सभी सामग्री तुरंत सीबीआई को सौंप दे।

पीठ ने कहा, ‘‘अगर जांच में यह पता चलता है कि कोई मामला नहीं बनता है, तो सीबीआई संबंधित अदालत के समक्ष उचित सारांश रिपोर्ट दाखिल करेगी।’’

इसने कहा कि सतीश सालियान को उस रिपोर्ट को चुनौती देने की आजादी होगी।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि सालियान एक ऐसी बेटी के ‘‘बदनसीब’’ पिता हैं जिसकी ‘‘दुखद परिस्थितियों’’ में मौत हो गई और इस मामले की गहन जांच की जरूरत है।

अदालत ने हालांकि यह भी कहा कि वह सतीश सालियान द्वारा कुछ व्यक्तियों पर लगाए गए आरोपों का उल्लेख नहीं कर रही है।

इसने पुलिस की जांच में कुछ कमियां बताईं और कहा कि घटनास्थल पर पंचनामा (जहां शव मिला था) बहुत देर से किया गया था।

अदालत ने इस बात पर भी संदेह जताया कि जिस जगह गिरकर दिशा सालियान की मौत हुई, वहां खून का कोई निशान नहीं मिला और उसके सिर पर भी खून बहने वाली चोट नहीं थी।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अगर सालियान 14वीं मंजिल से मुंह के बल गिरी थीं तो यह मानना ​​मुश्किल है कि उनकी ठुड्डी पर सिर्फ एक ही चोट थी। चेहरे की एक भी हड्डी नहीं टूटी थी। इसे स्वीकार करना हमारे लिए कठिन है।’’

पीठ ने कहा कि सीबीआई इस मामले की जांच के लिए किसी उपयुक्त अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त करे।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘किसी भी व्यक्ति को तब तक आरोपी नहीं माना जाए जब तक कि जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर जांच अधिकारी की राय में किसी व्यक्ति के खिलाफ उचित संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिल जाते।’’

इसने कहा कि अगर कोई अपराध बनता है तो सक्षम अदालत के सामने उचित रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।

जांच के बाद पुलिस ने दावा किया था कि दिशा सालियान की मौत आत्महत्या का मामला है। हालांकि उनके पिता ने पिछले साल उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनकी बेटी से सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई थी।

सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने इस मामले में पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।

सालियान ने अपनी बेटी की मौत की सीबीआई जांच और शिवसेना (उबाठा) के विधायक एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया कि जून 2020 में उनकी बेटी संदिग्ध हालात में मृत पाई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई थी और बाद में कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए राजनीतिक रूप से मामले को दबाने की कोशिश की गई।

इससे पूर्व, आदित्य ठाकरे ने भी उच्च न्यायालय में एक अर्जी दाखिल करके सतीश सालियान की याचिका में दखल देने का अनुरोध किया था और अदालत से गुजारिश की थी कि कोई भी आदेश देने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।

ठाकरे ने अपनी याचिका में कहा कि सतीश सालियान की ओर से दाखिल याचिका झूठी, निराधार और दुर्भावना से प्रेरित है।

भाषा

नेत्रपाल माधव

माधव


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