पद संभालने से पहले हुई थी घटना : एमपीएससी अध्यक्ष ने प्रश्नपत्र लीक मामले में दी सफाई

पद संभालने से पहले हुई थी घटना : एमपीएससी अध्यक्ष ने प्रश्नपत्र लीक मामले में दी सफाई

पद संभालने से पहले हुई थी घटना : एमपीएससी अध्यक्ष ने प्रश्नपत्र लीक मामले में दी सफाई
Modified Date: September 2, 2026 / 04:26 pm IST
Published Date: September 2, 2026 4:26 pm IST

मुंबई, दो सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने अपने इस्तीफे की मांग के बीच कहा कि औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना उनके आयोग का अध्यक्ष पद संभालने से पहले हुई थी।

भीमनवार ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि औषधि निरीक्षक परीक्षा से जुड़ी यह घटना जनवरी 2026 में हुई थी जबकि उन्होंने एमपीएससी के अध्यक्ष का पद 18 फरवरी को संभाला और तीन मार्च को कार्यभार ग्रहण किया।

प्रश्नपत्र लीक को लेकर अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों के बारे में भीमनवार ने कहा, ‘‘घटना किस अवधि के दौरान हुई इससे जुड़े तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।’’

उन्होंने कहा कि एमपीएससी ने कथित प्रश्नपत्र लीक को गंभीरता से लिया है और इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मुंबई पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें परीक्षा में सातवां स्थान हासिल करने वाली एक महिला अभ्यर्थी भी शामिल है।

भीमनवार के अनुसार, आयोग ने एक उच्चस्तरीय आंतरिक समिति भी गठित की है जो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने और परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उपाय सुझाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में जरूरी सुधारों का सुझाव देने के लिए अलग से एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है।

भीमनवार ने कहा कि पद संभालने के बाद से उनका पूरा ध्यान आयोग की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता, दक्षता और सुरक्षा को मजबूत करने पर रहा है।

भीमनवार ने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, अभ्यर्थियों और नागरिकों को सरकारी परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाने और अपनी चिंताएं व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतांत्रिक व्यवस्था में मैं ऐसे सवालों का स्वागत करता हूं। हालांकि, किसी भी गंभीर आरोप का आकलन केवल तथ्यों, आधिकारिक रिकॉर्ड और सबूतों के आधार पर किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने अपील की कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को व्यक्तिगत आरोपों या राजनीतिक विवादों का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर ऐसे आरोप सामने आए हैं कि प्रश्नपत्र लीक की घटना में भीमनवार की भूमिका थी।

औषधि निरीक्षकों की भर्ती प्रक्रिया 29 जुलाई 2025 को जारी एक विज्ञापन के जरिए शुरू की गई थी। स्क्रीनिंग परीक्षा इस साल 22 मार्च को महाराष्ट्र के छह संभागीय मुख्यालयों पर ऑफलाइन आयोजित की गई थी। आयोग ने पहले बताया था कि परीक्षा का परिणाम 12 जून को घोषित किया गया जिसके बाद 506 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए पात्र पाए गए।

इनमें से 488 अभ्यर्थी एक से 22 जुलाई के बीच आयोजित साक्षात्कार में शामिल हुए। साक्षात्कार पूरा होने के बाद एमपीएससी ने 488 अभ्यर्थियों की अस्थायी सामान्य मेरिट सूची जारी की। आयोग के अनुसार, इनमें 485 अभ्यर्थी नियुक्ति के लिए पात्र पाए गए जबकि तीन को अयोग्य घोषित किया गया।

हालांकि, स्क्रीनिंग परीक्षा के संचालन को लेकर आयोग को 22 से 26 जुलाई के बीच कुछ अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से ई-मेल के जरिए शिकायतें प्राप्त हुईं।

भाषा गोला नरेश

नरेश


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