यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर उपभोक्ताओं के लिए ‘डिजिटल ट्रैप’ : राज ठाकरे

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यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर उपभोक्ताओं के लिए ‘डिजिटल ट्रैप’ : राज ठाकरे

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  • Publish Date - September 19, 2026 / 04:31 PM IST,
    Updated On - September 19, 2026 / 04:31 PM IST

मुंबई, 19 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कुछ निर्धारित यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने संबंधी केंद्र के फैसले को शनिवार को भारतीय व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए एक ‘डिजिटल ट्रैप” करार दिया।

उन्होंने इस फैसले को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए।

सरकार ने मंगलवार को 15 अक्टूबर से बड़े व्यापारी भुगतान के लिए यूपीआई लेनदेन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू करने की घोषणा की। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा।

‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले किसी व्यापारी से लिया जाता है।

मनसे प्रमुख ने ‘एक्स’ पर कहा कि सरकार ने डिजिटल लेनदेन के लिए यूपीआई (यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) प्रणाली शुरू की थी और उसने लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद की और उसे वह मिली।

ठाकरे ने कहा, ‘‘लेकिन अगर इस डिजिटल भुगतान प्रणाली को शुरू करने के पीछे की मंशा वास्तव में वित्तीय लेनदेन को आसान बनाना थी, तो निवेश के चरण से ही ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ डाले बिना इसे टिकाऊ बनाया जा सके।’’

उन्होंने कहा कि मनसे एमडीआर का विरोध कर रही है और व्यापारियों से नए शुल्क का भुगतान नहीं करने की अपील की।

ठाकरे ने कहा कि ऐसी भुगतान प्रणालियों के दीर्घकालिक रखरखाव और साइबर सुरक्षा के लिए धन की आवश्यकता होती है। उन्होंने सवाल किया कि इस उद्देश्य के लिए स्थायी बजटीय प्रावधान क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने कहा, “एमडीआर लागू करके या सीधे शब्दों में कहें तो यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाकर (हालांकि यह सभी लेनदेन पर नहीं है), केंद्र सरकार ने भारतीयों के लिए, चाहे वे व्यापारी हों या उपभोक्ता, एक ‘डिजिटल ट्रैप’ तैयार कर दिया है।’’

ठाकरे ने 2016 में की गई नोटबंदी, यूपीआई की शुरुआत और शुल्क लगाए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

कांग्रेस के इस आरोप का जिक्र करते हुए कि यह कदम अमेरिका के दबाव में उठाया गया, ठाकरे ने पूछा कि क्या केंद्र सरकार यह बता सकती है कि इस फैसले से पहले उसने किससे विचार-विमर्श किया था।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश