शिक्षण संस्थान नयी पीढ़ी की आकांक्षाओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में बदलाव करें : होसबाले

शिक्षण संस्थान नयी पीढ़ी की आकांक्षाओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में बदलाव करें : होसबाले

शिक्षण संस्थान नयी पीढ़ी की आकांक्षाओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियों में बदलाव करें : होसबाले
Modified Date: August 1, 2026 / 07:22 pm IST
Published Date: August 1, 2026 7:22 pm IST

मुंबई, एक अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने शनिवार को कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को नयी पीढ़ी की आकांक्षाओं के अनुरूप अपनी शिक्षण पद्धतियों में लगातार परिवर्तन करते रहना चाहिए और साथ ही इन्हें भारत की सभ्यतागत ज्ञान-परंपरा से जुड़े रहना चाहिए।

होसबाले मुंबई में ‘नेशनल स्टॉक एक्सचेंज’ में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और मुंबई विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘विकसित भारत के लिए शिक्षा’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

आरएसएस द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम में देशभर के शिक्षाविदों, उद्योग जगत की हस्तियों, नीति-निर्माताओं, कुलपतियों और मंत्रियों ने हिस्सा लिया।

होसबाले ने कहा, ‘‘शैक्षणिक संस्थानों को नयी पीढ़ी की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अपनी शिक्षण पद्धतियों में लगातार बदलाव करते रहना चाहिए, लेकिन साथ ही भारत की संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान-विरासत से जुड़े मूल्यों को भी बनाए रखना चाहिए।’’

बयान के अनुसार, होसबाले ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है, जो केवल ज्ञान और कौशल ही नहीं, बल्कि चरित्र और मूल्यों का भी विकास करे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा को विद्यार्थियों के जीवन के समग्र विकास के लिए उन्हें तैयार करना चाहिए, जिसमें भौतिक प्रगति के साथ नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का संतुलन हो।

विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए, होसबाले ने इसे देश की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया, न कि अंतिम लक्ष्य। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रगति को राष्ट्र की सांस्कृतिक नींव से जुड़ा रहना चाहिए।

भाषा

देवेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल


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