पेड़ों का गिरना या फिर बिजली गिरना इंसानों के हाथ में नहीं: शिवसेना मंत्री
पेड़ों का गिरना या फिर बिजली गिरना इंसानों के हाथ में नहीं: शिवसेना मंत्री
मुंबई, एक जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिवसेना के नेता संजय शिरसाट ने मुंबई में एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक छात्र की मौत होने की घटना के बाद कहा कि पेड़ों का गिरना या फिर बिजली गिरना इंसानों के हाथ में नहीं होता।
शिरसाट की इस टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया है।
सामाजिक न्याय मंत्री ने विवादित टिप्पणी करने के एक दिन बाद बुधवार को सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नगर निकाय को पहले से ही पेड़ों की उचित छंटाई सुनिश्चित करनी चाहिए थी।
मंगलवार अपराह्न करीब तीन बजे चेंबूर में पीपल का एक बड़ा पेड़ स्कूल बस पर गिर गया, जिसके नीच दबकर 11 वर्षीय छात्र विहान श्रीवास्तव की मौत हो गई, जबकि चार वर्षीय बच्ची समेत चार अन्य बच्चे घायल हो गए।
यह बस ‘यूनिवर्सल हाई स्कूल’ के 13 विद्यार्थियों को उनके घर छोड़ने जा रही थी।
शिरसाट ने इस घटना के बारे में पूछे जाने पर मंगलवार को कहा था, “किसे पता था कि पेड़ गिरने वाला है?”
उन्होंने कहा था, “पेड़ का गिरना या बिजली गिरना हमारे हाथ में नहीं है। हो सकता है कि तेज हवा चली हो।”
शिरसाट की टिप्पणियों पर विपक्षी कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)-शरदचंद्र पवार (शप) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने मंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि ये टिप्पणियां सरकार के भीतर मौजूद ‘अहंकार के स्तर’ को दर्शाती हैं।
पटोले ने कहा, “मानसून की तैयारियां केवल कागजों पर थीं, जमीन पर कुछ भी नहीं था।”
राकांपा (शप) के नेता क्लाइड क्रैस्टो ने शिरसाट की टिप्पणियों को ‘शर्मनाक’ और ‘संवेदनहीन’ बताया।
उन्होंने कहा कि एक बच्चे की मौत को प्राकृतिक घटना बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि मानसून शुरू होने से पहले पेड़ों का उचित सर्वेक्षण और रखरखाव किया जाना चाहिए था।
शिरसाट ने हालांकि, बुधवार को पत्रकारों से कहा कि उनकी टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला गया।
शिरसाट ने कहा, “यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। मैंने कहा था कि भले ही पेड़ों का गिरना एक प्राकृतिक घटना हो, लेकिन नगर निकाय को आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए। जो पेड़ गिरने की स्थिति में हों, उन्हें मानसून शुरू होने से पहले हटा दिया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “मैंने सिर्फ इतना कहा था कि अगर पेड़ का गिरना प्राकृतिक कारणों से भी हुआ हो, तब भी नगर निकाय को उचित सावधानी बरतनी चाहिए थी। पेड़ों की छंटाई काफी पहले कर दी जानी चाहिए थी। प्रकृति संरक्षण के नाम पर ऐसी चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
मंत्री ने कहा, “नहीं तो भविष्य में ऐसी और घटनाएं फिर हो सकती हैं।”
शिरसाट ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनके बयान को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अब भी इस मामले को लेकर चिंतित है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रयास कर रही है।
मंत्री ने यह भी कहा कि पेड़ों का नियमित रूप से सर्वेक्षण किया जाता है और राज्य सरकार इस घटना पर विधानसभा में बयान देगी।
उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मुंबई नगर निकाय को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह मुद्दा बुधवार को विधानसभा में भी उठा, जहां सदस्यों ने इस घटना के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को जिम्मेदार ठहराया।
सत्तारूढ़ शिवसेना के सदस्यों तुकाराम काटे और मुरजी पटेल ने इस घटना को लेकर नगर निकाय की आलोचना की।
चेंबूर का प्रतिनिधित्व करने वाले काटे ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में इस तरह की दुर्घटना पहली बार नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, “मैं लगातार नगर निकाय के अधिकारियों से एहतियाती कदम उठाने की अपील करता रहा हूं, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ।”
पटेल ने सरकार से छात्र के परिवार और घायल पीड़ितों की मदद के लिए कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बच्चे के परिवार को 2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दे रहे हैं।
पटेल ने पश्चिमी उपनगर अंधेरी के मारोल इलाके में पेड़ गिरने की एक अन्य घटना का उल्लेख करते हुए इस तरह की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए तत्काल पेड़ों का सर्वेक्षण कराये जाने की मांग की।
भाषा जितेंद्र नरेश
नरेश

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