महाराष्ट्र में किसानों ने एक्सप्रेसवे को रद्द करने या सामूहिक आत्महत्या की अनुमति देने की मांग की

महाराष्ट्र में किसानों ने एक्सप्रेसवे को रद्द करने या सामूहिक आत्महत्या की अनुमति देने की मांग की

महाराष्ट्र में किसानों ने एक्सप्रेसवे को रद्द करने या सामूहिक आत्महत्या की अनुमति देने की मांग की
Modified Date: January 2, 2026 / 06:24 pm IST
Published Date: January 2, 2026 6:24 pm IST

नांदेड़, दो जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के कुछ हिस्सों में किसानों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपने खून से एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने प्रस्तावित नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे को या तो रद्द करने या उन्हें ‘सामूहिक रूप से मरने’ की अनुमति देने की मांग की है।

अर्धापुर और मालेगांव क्षेत्रों के किसानों ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भेजा।

इस ज्ञापन पर 200 से अधिक प्रभावित किसानों के हस्ताक्षर हैं। इसमें परियोजना का विरोध करने के लिए गठित कार्यसमिति ‘शक्तिपीठ हाईवे विरोधी कृति समिति’ के समन्वयक सुभाष मोरलवार और सतीश कुलकर्णी भी शामिल हैं।

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पत्र में उन्होंने कहा कि प्रस्तावित राजमार्ग मार्ग से अत्यधिक उपजाऊ और सिंचित भूमि नष्ट हो जाएगी, जहां विदेशों में सीधे निर्यात की जाने वाली केले और हल्दी जैसी फसलें उगाई जाती हैं। ये भूमि लोअर और अपर पैनगंगा सिंचाई परियोजनाओं के लाभ क्षेत्र में आती है।

‘शक्तिपीठ हाईवे विरोधी कृति समिति’ ने सरकार के ‘दोहरे मापदंड’ पर सवाल उठाया और उससे आग्रह किया कि या तो परियोजना को रद्द कर दिया जाए या प्रभावित किसानों को सामूहिक रूप से आत्महत्या करने का विकल्प दिया जाए।

मोरलवार और कुलकर्णी ने कहा कि सरकार ने हाल ही में विधानसभा में संकेत दिया है कि समानांतर मार्गों की उपलब्धता के कारण सोलापुर, सांगली और कोल्हापुर जिलों में राजमार्ग के संरेखण में बदलाव किया जा सकता है।

उन्होंने पूछा, ‘अगर यह तर्क वहां लागू होता है तो यहां इसकी अनदेखी क्यों की जा रही है?’ उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 361 (नागपुर-रत्नागिरी) पहले से ही उनके क्षेत्र से मात्र तीन से आठ किलोमीटर की दूरी से गुजरता है।

उन्होंने पूछा, ‘हमारी उपजाऊ भूमि को ही क्यों कुर्बान किया जाना चाहिए?’

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार तत्काल समाधान निकालने में विफल रही आंदोलन और तेज हो जाएगा तथा इसके परिणामों के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

भाषा शुभम रंजन

रंजन


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