केवल ‘कठोर शब्दों’ से काम नहीं चलेगा, वायु प्रदूषण के आर्थिक प्रभाव का आकलन करना जरूरी : अदालत
केवल ‘कठोर शब्दों’ से काम नहीं चलेगा, वायु प्रदूषण के आर्थिक प्रभाव का आकलन करना जरूरी : अदालत
मुंबई, 27 जनवरी (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि अर्थव्यवस्था पर वायु प्रदूषण के प्रभाव का आकलन करने की आवश्यकता है और केवल ‘‘कठोर शब्दों का इस्तेमाल करने से कोई परिणाम नहीं निकलेगा।’’
वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान, न्यायमित्र डेरियस खंबाटा ने दावोस में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ की इस हालिया टिप्पणी का हवाला दिया कि ‘‘प्रदूषण भारत के लिए व्यापार संबंधी चुनौतियों की तुलना में एक बड़ा आर्थिक खतरा है।’’
अदालत ने बढ़ते वायु प्रदूषण का 2023 में स्वतः संज्ञान लिया था और समस्या से निपटने के लिए कदम उठाने के वास्ते नगर निकायों और अन्य प्राधिकारों को कई निर्देश जारी किए थे।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 23 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई के दौरान वायु प्रदूषण को कम करने के उसके आदेशों की “जानबूझकर अवहेलना” करने के लिए नगर निकाय अधिकारियों की कड़ी आलोचना की थी और बृहन्मुंबई महानगरपालिका के शीर्ष अधिकारियों के वेतन रोकने की चेतावनी दी थी।
मंगलवार को जब इस मामले की सुनवाई हुई, तो न्यायमित्र डेरियस खंबाटा ने अपनी दलीलों के दौरान प्रदूषण को भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक खतरा बताते हुए गोपीनाथ की टिप्पणियों का उल्लेख किया।
आईएमएफ की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री ने स्विट्जरलैंड के दावोस में हाल ही में संपन्न विश्व आर्थिक मंच की बैठक में ये टिप्पणियां की थीं।
खंबाटा ने कहा कि प्रदूषण की आर्थिक लागत का विश्लेषण करना आवश्यक है।
पीठ ने कोई निर्देश पारित किए बिना मामले की आगे की सुनवाई बृहस्पतिवार के लिए स्थगित कर दी, लेकिन मौखिक रूप से टिप्पणी की कि ‘‘प्रदूषण के आर्थिक प्रभाव का आकलन करना आवश्यक है”।
पीठ ने कहा, “कठोर शब्दों से कोई परिणाम नहीं निकलेगा।”
भाषा प्रशांत सुभाष
सुभाष


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