‘मैं भारत और मानवता का समर्थक हूं’, ‘बंटवारा 1947’ की आलोचना पर राजकुमार संतोषी ने दिया जवाब

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‘मैं भारत और मानवता का समर्थक हूं’, ‘बंटवारा 1947’ की आलोचना पर राजकुमार संतोषी ने दिया जवाब

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  • Publish Date - August 22, 2026 / 06:08 PM IST,
    Updated On - August 22, 2026 / 06:08 PM IST

मुंबई, 22 अगस्त (भाषा) फिल्मकार राजकुमार संतोषी का कहना है कि मानवता सभी धर्मों से ऊपर है और विभाजन पर आधारित उनकी नयी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में भी मुख्य रूप से यही दिखाया गया है।

उन्होंने कहा कि फिल्म में किसी धर्म या देश को जानबूझकर बुरा नहीं दिखाया गया है।

संतोषी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत के दौरान कहा, “मेरा मानना है कि सच बोलना किसी मौसम या चलन पर निर्भर नहीं है। सच बिना किसी झिझक के बोलना चाहिए। ‘बंटवारा’ विषय मेरे दिल के बहुत करीब है।”

आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी और सनी देओल अभिनीत यह फिल्म असगर वजाहत के चर्चित नाटक “जिस लाहौर नइ वेख्या, ओ जम्या ई नइ” पर आधारित है।

फिल्म में एक मुस्लिम शरणार्थी परिवार लखनऊ से लाहौर जाता है और उसे एक हिंदू परिवार की छोड़ी हुई हवेली रहने के लिए मिलती है। जब मुस्लिम परिवार को यह पता चलता है कि बुजुर्ग हिंदू महिला ‘माई’ (शबाना आजमी) अभी भी उस हवेली में रह रही हैं और अपने पुश्तैनी घर को छोड़ने से इनकार कर रही हैं, तो वह परेशान हो जाता है। इस दौरान दोनों पक्षों को विभाजन के दर्द, नुकसान और उससे जुड़ी नैतिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।

संतोषी ने कहा, “मैंने कभी दुष्प्रचार पर आधारित फिल्म नहीं बनाई और न ही भविष्य में कभी ऐसा करूंगा। मैं केवल वही फिल्में बनाता हूं, जिन्हें मुझे लगता है कि दर्शकों के साथ साझा किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यह फिल्म मानवता पर केंद्रित है, जिसमें एक किरदार हिंदू है और दूसरा मुस्लिम। मेरा यह भी मानना है कि मानवता सभी धर्मों से ऊपर है।”

फिल्म 14 अगस्त को रिलीज हुई और इसे अच्छी प्रतिक्रियाएं मिलीं, लेकिन आलोचना का भी सामना करना पड़ा। दर्शकों के एक वर्ग ने फिल्म को मुस्लिम और पाकिस्तान समर्थक बताया, लेकिन संतोषी इससे परेशान नहीं हैं।

‘घायल’, ‘घातक’, ‘दामिनी’ और ‘लज्जा’ जैसी फिल्म बना चुके संतोषी (70) ने कहा, “मैं (फिल्म बनाने से) कभी डरा नहीं, क्योंकि मेरा जमीर साफ है और मेरी नीयत अच्छी है। मेरे मन में किसी के लिए कोई दुर्भावना नहीं है। मैं भारत समर्थक और मानवता समर्थक हूं। मैं किसी का नुकसान नहीं चाहता, तो फिर मैं पाकिस्तान का नुकसान क्यों चाहूंगा? पाकिस्तान एक बड़ा देश है; उसे खुशहाल और समृद्ध होना चाहिए।”

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप