पुणे, 22 अगस्त (भाषा) कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को कहा कि देशभर के युवाओं में सत्ताधारियों के खिलाफ गुस्सा है और आरोप लगाया कि पुणे में पार्टी सांसद राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को बाधित करने की एक साजिश है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार शाम यहां ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्राओं के साथ संवाद करने वाले हैं।
कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए खेड़ा ने कहा कि कार्यक्रम को मिल रही प्रतिक्रिया से राज्य सरकार घबरा गई है। उन्होंने कहा, ‘गुस्सा केवल पुणे और महाराष्ट्र के युवाओं में नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं में है और इतिहास गवाह है कि जब युवा गुस्से में आते हैं, तो बदलाव लाते हैं।’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘युवाओं के गुस्से का तूफान पुणे में साफ सुनाई दे रहा है। जब कोई युवती अपनी आवाज उठाती है, तो सत्ता में बैठे लोग खुद को खतरे में महसूस करते हैं। उसके खिलाफ ट्रोल किए जाते हैं, उसके कपड़ों पर टिप्पणियां की जाती हैं और उसके चरित्र पर हमला किया जाता है।’
खेड़ा ने कहा कि सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान की सोच महिलाओं और छात्राओं को घरों तक सीमित रखने और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भाग लेने से रोकने की है।
उन्होंने कहा, ‘हमने यह मानसिकता महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के दौरान देखी थी। आज भी विधेयक पारित होने के बावजूद परिसीमन और जनगणना के नाम पर इसके क्रियान्वयन में देरी की जा रही है।’
राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन आफ इंडिया (एनएसयूआई) के सदस्यों के बीच शुक्रवार को सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के छात्रावास परिसर में झड़प हुई थी।
एबीवीपी सदस्यों ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस कार्यकर्ता कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे (सीओईपी) की छात्राओं पर ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराने का दबाव डाल रहे थे। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि कार्यक्रम के समर्थन में बोलने वाली दो छात्राओं को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने छात्रावास में बंधक बनाकर धमकाया।
झड़प के बाद पुलिस ने शनिवार को 50 से 60 युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया।
कथित हंगामे का उल्लेख करते हुए खेड़ा ने आरोप लगाया कि एबीवीपी कार्यकर्ता छात्राओं के छात्रावास में घुसे और उन्हें डराया-धमकाया। उन्होंने कहा, ‘कल रात ही आरएसएस-भाजपा ने अपना असली चेहरा दिखाया, जब एबीवीपी के गुंडे सीओईपी छात्रावास में घुसे और लड़कियों को धमकाया। वे यह संदेश देना चाहते हैं कि महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए और उनकी जगह घर के अंदर है। यही वजह है कि ‘छात्रों की गूंज’ का विषय प्रासंगिक है, क्योंकि राहुल गांधी सही समय पर छात्रों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।’
खेड़ा ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम को बाधित करने की साजिश कई दिनों से चल रही थी। उन्होंने कहा, ‘पुणे और महाराष्ट्र के छात्रों की कुछ खास चिंताएं थीं। उनकी छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित धन को दूसरी जगह भेजा जा रहा है और कुछ छात्राएं यह मुद्दा राहुल गांधी के सामने उठाना चाहती थीं। इससे सरकार और एबीवीपी नाराज हो गए। इन छात्राओं की पहचान की गई और कथित तौर पर एबीवीपी कार्यकर्ता छात्रावास में घुसे तथा उन्हें धमकाया।’
उन्होंने दावा किया कि घटना के बाद छात्राओं को माफी मांगने वाले वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए मजबूर किया गया।
सीओईपी टेक्निकल यूनिवर्सिटी की छात्राओं ने एक समाचार के लिए एक संक्षिप्त बयान में छात्रवृत्ति का मुद्दा उठाया था, लेकिन बाद में कॉलेज से माफी मांग ली थी।
खेड़ा ने कहा, ‘इन लड़कियों ने हमारे स्वयंसेवकों से संपर्क करके बताया कि उन पर हमला हो रहा है। उन्हें धमकाकर ऐसे वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए मजबूर क्यों किया गया? यह पुरुष अहंकार का उदाहरण है।’
उन्होंने आरोप लगाया कि सैकड़ों एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने छात्रावास के अंदर लड़कियों पर हमला किया और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ भी मारपीट की। उन्होंने इसे महाराष्ट्र और देश में ‘भाजपा के कुशासन’ का उदाहरण बताया।
खेड़ा ने कहा, ‘पुणे में महिलाओं और ‘छात्रों की गूंज’ का विषय इसलिए सामने लाया गया, क्योंकि क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सावित्रीबाई फुले ने इसी शहर में महिला शिक्षा की नींव रखी थी।’
उन्होंने सवाल किया, ‘देश में लोग विकसित भारत की बात कर रहे हैं, लेकिन अगर देश की 50 प्रतिशत आबादी को प्रगति की इस यात्रा में भाग लेने से रोका जाएगा, तो भारत विकसित कैसे बनेगा?’
भाषा
अमित दिलीप
दिलीप