मुंबई, 21 सितंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई ने सोमवार को कहा कि उसने 22 वर्षीय छात्र की आत्महत्या को लेकर छात्रों और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बीच डीन (प्रशासनिक मामले) सूर्यनारायण डूला को उनके पद से हटा दिया है।
इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में डूला का नाम है, जिसमें जातिगत भेदभाव के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
संस्थान ने पिछले एक संवाद में छात्र, साहिल वाकोडे के खिलाफ बिना किसी विस्तृत जांच के उसे ‘बदनाम’ करने का आरोप छात्रों द्वारा लगाये जाने के बाद एक सार्वजनिक माफीनामा भी जारी किया।
संस्थान ने कहा, ‘‘जांच जारी होने के मद्देनजर, साहिल की मृत्यु से पहले हुई घटनाओं से संबंधित विवरण को उचित जांच प्रक्रिया के जरिये पूरी तरह स्थापित किए जाने से पहले सामने रखना या उन्हें किसी विशेष रूप में पेश करना उचित नहीं था।’’
संस्थान ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा था कि साहिल ने परीक्षा के दौरान कथित तौर पर उत्तर पाने के लिए प्रश्नपत्र चैटजीपीटी पर अपलोड किया था। संस्थान ने कहा था कि हालांकि, उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
डूला को डीन पद से हटाने के फैसले से प्रदर्शनकारी छात्र संतुष्ट नहीं हुए। छात्रों ने कहा कि उन्होंने डूला को प्रोफेसर के पद से निलंबित करने की मांग की थी, न कि केवल प्रशासनिक पद से हटाने की।
छात्र मामलों के पूर्व डीन डूला को पद से हटाने के फैसले की जानकारी आईआईटी मुंबई के निदेशक शिरीष केदारे ने ईमेल के जरिए छात्रों को दी।
साहिल के अभिभावकों ने एक प्रोफेसर द्वारा उनके बेटे के साथ जातिगत भेदभाव किये जाने का आरोप लगाया है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई के फैकल्टी फोरम ने कहा कि वह प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के साथ ‘‘मजबूती से खड़ा’’ है। फोरम ने कहा कि प्रो. डूला ने डीन (छात्र मामलों) के तौर पर अपने लंबे कार्यकाल के दौरान परिसर में छात्र समुदाय के कल्याण के लिए कई पहल शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
फैकल्टी फोरम ने यह भी कहा कि वह ‘‘झूठी और भ्रामक मीडिया खबरों’’ के जरिये उसके सहयोगी की छवि खराब किए जाने से ‘‘व्यथित’’ है।
अधिकारियों के अनुसार, ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक द्वितीय वर्ष का छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे (22) 18 सितंबर की शाम आईआईटी मुंबई के पवई परिसर स्थित अपने छात्रावास के कमरे में पंखे से लटका मिला था। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना उसके मध्यावधि परीक्षा के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पकड़े जाने के कुछ घंटे बाद हुई।
महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले साहिल के परिवार ने आरोप लगाया कि यह कदम उठाने से पहले साहिल को संस्थागत उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसके बाद परिसर में छात्रों ने प्रदर्शन किया।
साहिल के पिता रवींद्र वाकोडे ने कहा, “वह हमारा इकलौता बेटा था। बहुत संघर्ष के बाद हम उसे इस मुकाम तक पहुंचा पाए थे और अब उन्होंने मेरे बेटे को खत्म कर दिया। कर्मचारियों ने जातिगत भेदभाव के जरिए उसे प्रताड़ित किया। मैं न्याय चाहता हूं।”
उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे का जाति के आधार पर मखौल उड़ाया गया, उसे प्रताड़ित किया गया और उसके साथ भेदभाव किया गया। उन्होंने अपने बेटे की मौत में आईआईटी मुंबई प्रशासन की भूमिका की जांच की मांग की।
वहीं, साहिल की नानी श्यामलता तायडे ने यवतमाल में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘आईआईटी मुंबई की ओर से मानसिक प्रताड़ना साहिल की आत्महत्या की एक वजह हो सकती है।’’
सभी छात्रों के साथ समान व्यवहार की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वाकोडे जैसे प्रतिभाशाली छात्रों को अपनी जान लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है तो संस्थान के प्रशासन और छात्रावास के माहौल की भी जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘घर पर साहिल को रिश्तेदारों और अन्य लोगों का काफी समर्थन था, क्योंकि वह आईआईटी में पढ़ने के सभी के सपने को पूरा कर रहा था। सभी रिश्तेदार हमेशा उसके लिए अच्छा चाहते थे।’’
तायडे ने कहा कि पढ़ाई में बेहद प्रतिभाशाली होने के कारण किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि उसने आत्महत्या कर ली। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घटना होने पर संस्थान को सबसे पहले माता-पिता को सूचित करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। मुझे लगता है कि केवल साहिल की ही नहीं, बल्कि उसके माता-पिता की भी मौत हो गई है। अब उसके माता-पिता किसके लिए जिएंगे? मेरी बस यही मांग है कि साहिल के परिवार को न्याय मिले।’’
उधर, प्रदर्शनकारी छात्रों ने दावा किया कि साहिल पर काफी दबाव था और उसे शैक्षणिक निलंबन की धमकियां दी जा रही थीं।
केदारे ने रविवार देर रात प्रदर्शनकारी छात्रों से कहा था कि वह सोमवार को इस्तीफा दे देंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। हालांकि, संस्थान ने सोमवार को कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है।
इस बीच, पुलिस ने छात्र की आत्महत्या को लेकर आईआईटी मुंबई के मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। छात्रों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद परिसर और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई।
एक अधिकारी ने बताया कि कई स्थानीय निवासियों और पूर्व छात्रों ने परिसर में जाने का प्रयास किया। हालांकि, एहतियाती कदम के तौर पर प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है, केवल मौजूदा छात्रों और अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति है।
आईआईटी मुंबई प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के सदस्य संस्थान के मुख्य द्वार के बाहर एकत्र हुए।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘बाहरी संगठनों के कुछ प्रदर्शनकारी मुख्य द्वार पर एकत्र हुए थे। उन्हें तुरंत वहां से हटा दिया गया और एहतियातन हिरासत में ले लिया गया।’’
एक छात्र ने बताया कि वह साहिल के बगल वाले कमरे में रहता था और दोनों अक्सर साथ समय बिताते थे। छात्र ने कहा, ‘‘यहां छात्रों पर पढ़ाई का काफी दबाव रहता है, जिस पर प्रबंधन को ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, मैंने व्यक्तिगत रूप से परिसर में कभी जातिगत भेदभाव नहीं देखा। घटना वाले दिन एक प्रोफेसर साहिल को कक्षा से बाहर ले गए थे, क्योंकि वह कथित तौर पर नकल करते पकड़ा गया था। ऐसा लगता है कि उसके साथ कुछ गंभीर हुआ होगा, जिसके कारण उसने इतना बड़ा कदम उठाया।’’
छात्र समूहों और पूर्व छात्रों ने प्रशासन में व्यवस्था संबंधी समस्याओं का आरोप लगाया।
संस्थान के पूर्व छात्र प्रणव जीवन ने छात्र मामलों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों से निपटने के संस्थान के तरीके की आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया, “प्रशासन अक्सर छात्रावास से निकालने, निलंबन और भारी आर्थिक जुर्माने की मनमानी धमकियां देकर छात्रों को दंडित करता है। यहां तक कि एक नाटक आयोजित करने के लिए छात्रों पर 1.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। पिछली घटनाओं के बावजूद परिसर में जातिगत संवेदनशीलता को लेकर प्रभावी व्यवस्था, पर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य सहायता और भेदभाव से निपटने के लिए सशक्त एससी/एसटी प्रकोष्ठ का अभाव है।’’
जीवन ने दावा किया कि विस्तृत जांच से पहले जारी किए गए आधिकारिक बयानों का उद्देश्य संकाय सदस्यों को बचाना था। उन्होंने कहा कि संकाय में आरक्षण संबंधी नियमों का अनुपालन नहीं किया जाना भी एक मूल समस्या है, जिस पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया है।
प्रदर्शन को देखते हुए संस्थान के आसपास सुरक्षा और बढ़ा दी गई है।
वहीं आईआईटी-मुंबई के संकाय सदस्यों ने सोमवार को संस्थान परिसर में सूर्यनारायण डूला के समर्थन में एक मार्च निकाला। फैकल्टी फोरम ने कहा कि डूला ने 18 सितंबर को बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे के कथित तौर पर मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की सूचना देते समय ‘‘सीनेट द्वारा मंजूर परीक्षा प्रक्रिया’’ का पालन किया था।
भाषा अमित पवनेश
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