भारत ने व्यावहारिक नीतियों के माध्यम से चुनौतियों का सामना किया: जयशंकर
भारत ने व्यावहारिक नीतियों के माध्यम से चुनौतियों का सामना किया: जयशंकर
पुणे, 26 फरवरी (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि मौजूदा दशक उथल-पुथल भरा रहा है, लेकिन भारत ने चुनौतियों का घरेलू स्तर पर ठोस और व्यावहारिक नीतियों के माध्यम से सामना किया है।
जयशंकर ने पुणे इंटरनेशनल सेंटर द्वारा आयोजित एशिया इकनॉमिक डायलॉग के नौवें संस्करण में पहले से रिकॉर्ड किए गए अपने संदेश में कहा कि एकपक्षीय दिशा में होने वाले वैश्वीकरण का युग समाप्त हो गया है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की प्रकृति के बारे में लंबे समय से चली आ रही धारणाएं अब सवालों के घेरे में हैं।
विदेश मंत्री ने कहा, ‘यह दशक पहले ही उथल-पुथल भरा रहा है, लेकिन आने वाले समय में और भी उथल-पुथल की आशंका है। भारत ने घरेलू स्तर पर ठोस और व्यावहारिक नीतियों के माध्यम से चुनौतियों का सामना किया। वैश्विक वार्ताओं के प्रति अधिक आत्मविश्वासपूर्ण और वस्तुतः लाभकारी दृष्टिकोण में भी यही झलक दिखायी देती है।’
उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रकृति के निर्णय अब राजनीति और सुरक्षा संबंधी विचारों पर अधिक आधारित होते हैं और यह भी कि पुन: औद्योगीकरण को एक अत्यावश्यक रणनीतिक आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है।
जयशंकर ने कहा कि प्रौद्योगिकी, क्षमताएं और संसाधन तेजी से रणनीतिक परिसंपत्तियां माने जा रहे हैं। उन्होंने बताया, ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, डेटा और महत्वपूर्ण खनिज अब केवल विकास के चालक के रूप में ही नहीं देखे जाते हैं। वे राष्ट्रीय शक्ति के साधन भी हैं।’
केंद्रीय मंत्री जयशंकर ने कहा कि कोविड-19 महामारी, संघर्षों और जलवायु परिवर्तन ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की नाजुकता को उजागर किया है और खाद्य, स्वास्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया है।
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे विशाल देश के लिए अपनी समग्र राष्ट्रीय शक्ति का निरंतर विस्तार करते हुए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ गहन संबंध स्थापित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा हित व्यापार, आवागमन, उत्पादन, सेवाओं, प्रौद्योगिकी कौशल और प्रतिभा साझेदारी को बढ़ावा देने में निहित है।’’
जयशंकर ने विश्वास व्यक्त किया कि एशिया इकनॉमिक डायलॉग में शुल्क, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक गठबंधनों सहित महत्वपूर्ण भू-आर्थिक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
भाषा
अमित माधव
माधव

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