भारतीय मुसलमानों को इंडोनेशिया के सांस्कृतिक आदर्शों को अपनाना चाहिए: आरएसएस नेता
भारतीय मुसलमानों को इंडोनेशिया के सांस्कृतिक आदर्शों को अपनाना चाहिए: आरएसएस नेता
पुणे, 17 जून (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक वरिष्ठ नेता ने बुधवार को कहा कि हिंदू-मुस्लिम टकराव खत्म होना चाहिए क्योंकि ‘‘सभी का डीएनए एक ही है।’’ उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमानों को ‘‘सांस्कृतिक आदर्शों’’ के लिए पाकिस्तान के बजाय इंडोनेशिया की ओर देखना चाहिए।
‘पुणे यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स’ में पत्रकारों से बातचीत में आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने यह भी कहा कि संघ कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त संगठन है और इसके सभी वित्तीय लेन-देन बैंकिंग प्रणाली के जरिए होते हैं।
आरएसएस और मुस्लिम समुदाय के बीच संबंधों पर आंबेकर ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम टकराव इस संगठन के बनने से पहले से ही मौजूद था।
उन्होंने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, मुसलमानों के बीच यह धारणा बन गई कि धर्म बदलने से देश और इतिहास भी बदल जाता है। इसी अलगाववादी सोच के कारण अंततः विभाजन हुआ। अब यह टकराव खत्म होना चाहिए। सभी का डीएनए एक ही है।’’
आंबेकर ने कहा, ‘‘अब मुस्लिम समुदाय के भीतर से भी सामाजिक सुधार के लिए सकारात्मक पहल सामने आ रही हैं। भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तान की ओर नहीं, बल्कि इंडोनेशिया के सांस्कृतिक आदर्शों की ओर देखना चाहिए।’’
इंडोनेशिया में दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है और इसे हिंदू-बौद्ध सांस्कृतिक प्रभावों के लिए भी जाना जाता है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा हिंदू परिवारों के लिए तीन बच्चों की नीति की वकालत करने पर, आंबेकर ने जनसंख्या नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘यूरोप और चीन ने अपनी जनसंख्या नीतियों को बदल दिया है। भारत के संदर्भ में, जनसंख्या का संतुलन बनाए रखना ज़्यादा जरूरी है।’’
आरएसएस नेता ने कहा कि 1947 में देश के बंटवारे में जनसंख्या से जुड़े बदलावों की भूमिका थी और भविष्य में जनसंख्या का असंतुलन देश की पहचान और संस्कृति पर असर डाल सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘परिवार के आकार को लेकर आरएसएस नेतृत्व की ओर से कोई दबाव या निर्देश नहीं है। प्रत्येक परिवार को अपनी परिस्थितियों और जरूरतों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। यही संगठन का सांस्कृतिक दृष्टिकोण है।’’
आरएसएस के पंजीकरण संबंधी स्थिति पर पूछे गए सवालों के जवाब में आंबेकर ने कहा कि संगठन को लेकर कोई कानूनी विवाद नहीं है और राजनीतिक लाभ के लिए अनावश्यक भ्रम पैदा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘आरएसएस कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त सामाजिक संगठन है। समय-समय पर सरकारों ने अलग-अलग स्तरों पर इसका सहयोग लिया है। आरएसएस के पथ संचलन को पुलिस से अनुमति मिलती है और इसकी स्थानीय शाखाओं को बैंक खाते खोलने की इजाजत है। आरएसएस के सभी वित्तीय लेन-देन बैंकों के ज़रिए किए जाते हैं।’’
हाल ही में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने आरएसएस प्रमुख से संगठन की कानूनी स्थिति तथा उसे मिलने वाले दान, अंशदान और आय के स्रोतों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था।
भाषा आशीष माधव
माधव

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