वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान प्रदान करता है ‘एकात्म मानववाद’: किशन रेड्डी

वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान प्रदान करता है 'एकात्म मानववाद': किशन रेड्डी

वैश्विक चुनौतियों का स्थायी समाधान प्रदान करता है ‘एकात्म मानववाद’: किशन रेड्डी
Modified Date: January 23, 2026 / 04:35 pm IST
Published Date: January 23, 2026 4:35 pm IST

अमरावती(आंध्र प्रदेश), 23 जनवरी (भाषा) केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी के विचारक दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ‘एकात्म मानववाद’ का दर्शन राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों के लिए स्थायी समाधान प्रदान करता रहता है।

यहां ‘भारतीय जनसंघ राष्ट्रीय सम्मेलन’ में संबोधित करते हुए रेड्डी ने कार्यक्रम स्थल को ‘पवित्र’ बताया और याद दिलाया कि 1965 में यहां एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।

उन्होंने यह भी बताया कि यह कार्यक्रम स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के साथ आयोजित किया गया। सुभाष चंद्र बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

उपाध्याय की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद रेड्डी ने कहा, ‘‘एकात्म मानवतावाद का दर्शन आज भी प्रासंगिक है और राष्ट्र व विश्व के सामने आने वाली चुनौतियों का स्थायी समाधान प्रदान करता है।’’

उन्होंने कहा कि 60 साल पहले, 23 जनवरी को ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन को पहली बार इसी स्थान पर प्रतिपादित किया गया था। उन्होंने इसे ‘महान ऐतिहासिक महत्व का क्षण’ बताया।

रेड्डी ने कहा कि भारत को स्वतंत्रता मिलने के बावजूद सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, श्री अरबिंदो, बाल गंगाधर तिलक और लाला लाजपत राय जैसे राष्ट्रीय नेताओं के विचारों को दरकिनार कर दिया गया और इसके विपरीत व्यक्तिवाद, समाजवाद और साम्यवाद जैसी पश्चिमी विचारधाराओं को प्रमुखता मिली।

रेड्डी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दीर्घकालिक राष्ट्रीय मुद्दों के समाधान के लिए ‘एकात्म मानववाद’ के सिद्धांतों का पालन किया है।

‘एकात्म मानववाद’ एक सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक दर्शन है जो मानव जीवन के प्रति समग्र दृष्टिकोण की वकालत करता है, जिसमें व्यक्ति, समाज और प्रकृति की आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित किया जाता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारी उपाध्याय (1916-1968) भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेताओं में से एक थे। भारतीय जनसंघ ही आगे चलकर भाजपा के रूप में सामने आया। उपाध्याय की वर्ष 1968 में ट्रेन यात्रा के दौरान कथित लूटपाट के प्रयास के दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या कर दी गयी। वह इस घटना के समय जनसंघ के अध्यक्ष थे।

भाषा

शुभम संतोष

संतोष


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