मुंबई, 30 अगस्त (भाषा) दक्षिण मुंबई की कोलाहल से भरी सड़क पर करीब सौ साल पुरानी इमारत के भीतर शांत महौल में भारतीय धर्मग्रंथों के दुर्लभ फारसी और उर्दू अनुवादों को संरक्षित करने की कोशिश पूरे शिद्दत से की जा रही है। ये धर्म ग्रंथ देश की मिली-जुली संस्कृति और सबको साथ लेकर चलने वाले अतीत की निशानियां हैं।
अंजुमन-ए-इस्लाम संस्थान की 152 साल पुरानी इमारत में स्थित पुस्तकालय ने 1867 और 1896 के बीच प्रकाशित महाभारत, रामायण, भगवद गीता और शिव पुराण सहित 32 से अधिक हिंदू धर्मग्रंथों को संरक्षित करने का अभियान शुरू किया है।
मशहूर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के पास बनी इस इमारत में किताबों, समाचारपत्रों के साथ ही संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, मराठी, पश्तो और अरबी भाषाओं की पांडुलिपियां मौजूद हैं। साथ ही, यहां इतिहास, दर्शनशास्त्र, धर्मशास्त्र, साहित्य, भूगोल और कई अन्य विषयों पर किताबें भी हैं, जिनमें से कुछ 150 साल से भी पहले छपी थीं।
बदरुद्दीन तैयबजी ने 1874 में ‘अंजुमन-ए-इस्लाम’ की स्थापना की थी। इसके मौजूदा अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. जहीर काजी ने बताया कि यह पुस्तकालय 1898 में व्यापारी काजी अब्दुल करीमी पोरबंदरी द्वारा 4,500 बहुमूल्य किताबें दान करने के बाद स्थापित किया गया था और इसका नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया है।
इस पुस्कालय में मुगल बादशाह औरंगजेब के धार्मिक ग्रंथों और शाही फरमानों के अलावा, 1875 के दौर के दुर्लभ अखबार भी सरंक्षित हैं जिनमें जयपुर गजट, अंबाला गजट और काहिरा का ‘अल-काहिरा’ शामिल हैं। इनसे भारत के आज़ादी के आंदोलन की शुरुआती झलक मिलती है।
काज़ी ने कहा, ‘‘किताबें पुरानी हो गई हैं और उनके पन्ने नाज़ुक हो गए हैं। फफूंद और कीड़ों को हटाने के लिए उन पर खास रसायन का इस्तेमाल करना पड़ता है। जो किताबें अच्छी हालत में नहीं हैं, उन्हें सुरक्षित रखने के लिए खास कागज़ से चिपकाया जाता है।’’
उन्होंने बताया कि डिजिटलीकरण प्रक्रिया के लिए विशेषज्ञों की एक टीम को शामिल किया गया है और पन्नों को अंजुमन-ए-इस्लाम के क्लाउड अकाउंट पर अपलोड किया जा रहा है।
पुस्तकालय प्रभारी मोहम्मद ग़ालिब मुल्ला ने पुष्टि की कि किताबों के 1,00,000 से ज़्यादा पन्नों और अख़बारों व पत्रिकाओं के 70,000 पन्नों का डिजिटलीकरण कर लिया गया है, और अब आर्काइविंग प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सिर्फ़ 2,250 पन्ने बाकी हैं।
पुस्तकालय के दो अक्टूबर से फिर से खुलने की संभावना है।
भाषा धीरज नरेश
नरेश