रक्षा प्रतिष्ठानों के निकट निर्माण कार्यों के लिए देर से एनओसी लेना ठीक नहीं: उच्च न्यायालय
रक्षा प्रतिष्ठानों के निकट निर्माण कार्यों के लिए देर से एनओसी लेना ठीक नहीं: उच्च न्यायालय
मुंबई, छह मई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने यहां आईएनएस त्राता के पास स्थित दो आवासीय इमारतों के लिए कब्जा प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया और कहा कि रक्षा प्रतिष्ठानों के निकट निर्माण कार्यों के लिए देर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना ठीक नहीं है।
न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने पांच मई के फैसले में कहा कि रक्षा अधिकारियों से एनओसी हासिल करने के लिए संबंधित प्राधिकरणों को कानून की आवश्यकता के अनुसार उचित, निष्पक्ष और तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाना होगा।
इस आदेश की प्रति बुधवार को उपलब्ध कराई गई।
पीठ ने कहा कि यदि सुरक्षा चिंताओं और खतरे की आशंका को लेकर रक्षा अधिकारियों की दलीलों में वास्तव में कोई आधार है, तो कानून के अनुसार जो भी कदम जरूरी हों, वे (सैन्य प्रतिष्ठानों के पास) निर्माण गतिविधि की शुरुआत में ही उठाए जाने चाहिए।
उच्च न्यायालय ने कहा, “ऐसे मामलों में लापरवाही नहीं हो सकती, खासकर इस मामले की तरह, जहां निर्माण कार्य स्वीकृत योजनाओं और योजना प्राधिकरण द्वारा दी गई अनुमति के अनुसार काफी आगे बढ़ चुका है।”
अदालत ने जोर देकर कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत संपत्ति का अधिकार सुनिश्चित है और इस अधिकार का उल्लंघन या नुकसान ऐसे तरीके से नहीं किया जा सकता जो कानून द्वारा मान्यता प्राप्त न हो।
उच्च न्यायालय ने टेक्नो फ्रेशवर्ल्ड एलएलपी की याचिका स्वीकार की। कंपनी मध्य मुंबई के वर्ली स्थित प्रभादेवी इंद्रप्रस्थ को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (जिसमें दो आवासीय इमारतें हैं) की डेवलपर है। याचिका में अक्टूबर 2025 में जारी काम रोको नोटिस को चुनौती दी गई थी। यह नोटिस इस आधार पर दिया गया था कि कंपनी ने नौसेना से एनओसी नहीं ली थी।
महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएचएडीए) के अनुसार, एनओसी अनिवार्य थी क्योंकि इमारतें आईएनएस त्राता के पास स्थित हैं।
याचिका में एमएचएडीए द्वारा इमारतों को कब्जा प्रमाणपत्र देने से इनकार को भी चुनौती दी गई थी।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के निर्माण कार्यों के संबंध में नौसेना की ओर से एनओसी पर जोर देना “अवैध, अमान्य और अनुचित” था।
अदालत ने यह भी कहा कि एमएचएडीए द्वारा समय-समय पर मंजूरी प्रमाण पत्र देना और निर्माण पूरा करने की अनुमति देना वैध और सही था।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की इमारतों के लिए एनओसी की आवश्यकता नहीं थी।
अदालत ने कहा कि अक्टूबर 2025 का काम रोको नोटिस और एनओसी न होने के आधार पर कब्जा प्रमाणपत्र देने से इनकार किए जाने को “मनमाना और अवैध” करार दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि आईएनएस त्राता के आसपास बड़ी संख्या में इमारतें पहले से मौजूद हैं, जिनमें से कुछ बिना एनओसी के भी बनाई गई हैं।
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश

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