महाराष्ट्र: ऐतिहासिक हरिश्चंद्रगढ़ किले में सफाई अभियान के दौरान 115 बोरी प्लास्टिक कचरा एकत्र किया

महाराष्ट्र: ऐतिहासिक हरिश्चंद्रगढ़ किले में सफाई अभियान के दौरान 115 बोरी प्लास्टिक कचरा एकत्र किया

महाराष्ट्र: ऐतिहासिक हरिश्चंद्रगढ़ किले में सफाई अभियान के दौरान 115 बोरी प्लास्टिक कचरा एकत्र किया
Modified Date: May 22, 2026 / 09:23 pm IST
Published Date: May 22, 2026 9:23 pm IST

मुंबई, 22 मई (भाषा) पर्वतीय यात्रा करने के शौकीनों के बीच बेहद लोकप्रिय महाराष्ट्र का प्रसिद्ध किला हरिश्चंद्रगढ़ इस समय पर्यावरणीय समस्या से जूझ रहा है। किला परिसर में पर्यटकों द्वारा फेंका गया बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा बिखरा पड़ा है।

राज्य के कई अन्य किलों की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है, जो मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास से जुड़े हैं।

अहिल्यानगर जिले के इस किले में पिछले कुछ वर्षों में प्लास्टिक कचरे की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है लेकिन पुणे जिले के जुन्नर तालुका के एक स्वयंसेवी समूह ने किले को इस गंदगी से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया।

‘शिवनेरी ट्रेकर्स एसोसिएशन’ नामक इस गैरलाभकारी समूह ने पिछले सप्ताहांत किले में तीन दिनों का सफाई अभियान संचालित किया। समुद्र तल से 3,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित इस दुर्गम क्षेत्र से 55 लोगों के दल ने प्लास्टिक कचरे की 115 बोरियां और शराब की खाली बोतलों की पांच बोरियां एकत्र कीं।

समूह के अध्यक्ष नीलेश खोकराले ने बताया कि इस काम में 10 साल के बच्चों से लेकर 70 साल के बुजुर्गों तक ने हिस्सा लिया। उन्होंने करीब 15 क्विंटल प्लास्टिक कचरा और 250 किलो कांच की बोतलें जमा कीं, जिसे बाद में वन विभाग को सौंप दिया गया।

उन्होंने बताया कि प्राचीन मंदिर, गुफाओं और चढ़ाई के मुख्य रास्तों से तो कचरा हटा दिया गया है, लेकिन अब भी बहुत सारा कचरा ऐसी गहरी ढलानों और दुर्गम जगहों पर पड़ा है जहां पहुंचना बेहद मुश्किल है।

यह समस्या केवल इसी किले की नहीं है, बल्कि रायगढ़, सिंहगढ़, राजगढ़ और कलसूबाई जैसी चोटियों पर भी यही हाल है। सोशल मीडिया के कारण यहां आने वाले लोगों की संख्या तो बढ़ गई है, लेकिन कचरा साफ करने की व्यवस्था वैसी नहीं रही।

छठी शताब्दी के समय का माना जाने वाला यह किला इतिहास और प्रकृति दोनों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। यहां के घने जंगलों में तेंदुए और हिरण जैसे जानवर पाए जाते हैं।

भाषा सुमित पवनेश

पवनेश


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