महाराष्ट्र विस : मंत्रियों को दूसरे विभागों के सवालों का जवाब देने की अनुमति पर विपक्ष की आपत्ति
महाराष्ट्र विस : मंत्रियों को दूसरे विभागों के सवालों का जवाब देने की अनुमति पर विपक्ष की आपत्ति
मुंबई, 23 जून (भाषा) महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष ने मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के उस फ़ैसले पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने सदन में मौजूद मंत्रियों को दूसरे विभागों से संबंधित सवालों का जवाब देने की अनुमति दी थी।
राकांपा (शप) विधायक जयंत पाटिल ने इस अनुमति को वापस लेने की मांग की, वहीं शिवसेना (उबाठा) के आदित्य ठाकरे ने कहा कि किसी विभाग के राज्य मंत्री अपने विभाग से संबंधित सवाल का जवाब दे सकते हैं, लेकिन दूसरे विभागों के मंत्री ऐसा नहीं कर सकते।
कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री नितिन राउत ने कहा कि ऐसी परंपरा पहले कभी नहीं देखी गई।
विधानसभा अध्यक्ष ने अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकार चलाना एक सामूहिक ज़िम्मेदारी है, और ‘आप भी 2019 में यही कर रहे थे।’ जाहिर तौर पर उनका इशारा उस समय की ओर था, जब महा विकास आघाडी सत्ता में थी।
विपक्ष के सदस्यों ने अध्यक्ष के फ़ैसले के विरोध में कुछ देर के लिए सदन से बहिर्गमन किया।
पत्रकारों से बात करते हुए आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि नार्वेकर एक ‘अक्षम’ सरकार का बचाव कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने दावा किया कि महा विकास आघाडी शासन के दौरान, विधायी सत्रों के दौरान एक मंत्रालय का प्रभार दूसरे मंत्री को दिया जाता था। यह गलत है और इसे विधानसभा के रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए।’
उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की भी आलोचना की, क्योंकि वह विधायकों के सवालों का सीधे जवाब देने में ‘विफल’ रहे।
ठाकरे ने कहा कि शिंदे सत्र के दौरान नियमित रूप से अपनी मंत्री-स्तरीय ज़िम्मेदारियां दूसरों को सौंपते हैं, जो ‘अस्वीकार्य’ है। उन्होंने दावा किया कि महा विकास आघाडी सरकार के दौरान मंत्री सवालों का जवाब देने की सीधी ज़िम्मेदारी लेते थे।
राकांपा (शप) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने भी दावा किया कि विधानसभाध्यक्ष सरकार के ‘पाप’ पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि विधानसभाध्यक्ष के ‘भारी-भरकम शब्दों’ को समझने के लिए कांग्रेस सांसद शशि थरूर के पास भेजा जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जैसे वे ‘अनपढ़’ हों।
आव्हाड ने आरोप लगाया कि विधानसभा परिसर में विपक्ष को बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें कार्यालय के लिए स्थान भी नहीं दिया गया है। हम सीढ़ियों पर बैठकर खाना खाएंगे।’
शिवसेना (उबाठा) विधायक भास्कर जाधव ने भी कार्यालय नहीं मिलने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन छोटी पार्टियों के पास बहुत कम या कोई विधायक नहीं है, उन्हें ऑफिस दिए गए हैं, जबकि 20 विधायकों वाली उनकी पार्टी को बार-बार कहने के बावजूद नज़रअंदाज़ किया गया।
उन्होंने सवाल किया कि जन सुराज्य पार्टी के कार्यालय का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अध्यक्ष नार्वेकर ने क्यों किया, जबकि शिवसेना (उबाठा) को ऐसी सुविधा नहीं दी गई।
भाषा अविनाश दिलीप
दिलीप

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