महाराष्ट्र: दो नगर निकायों में कांग्रेस व एआईएमआईएम संग भाजपा के गठबंधन से सियासत गरमाई

महाराष्ट्र: दो नगर निकायों में कांग्रेस व एआईएमआईएम संग भाजपा के गठबंधन से सियासत गरमाई

महाराष्ट्र: दो नगर निकायों में कांग्रेस व एआईएमआईएम संग भाजपा के गठबंधन से सियासत गरमाई
Modified Date: January 7, 2026 / 11:05 pm IST
Published Date: January 7, 2026 11:05 pm IST

मुंबई, सात जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दो स्थानीय इकाइयों ने एक चौंकाने वाले कदम के तहत महाराष्ट्र की दो नगर पालिका परिषदों में धुर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ चुनाव बाद गठबंधन कर लिया जिससे सत्ताधारी दल और विपक्षी दलों के प्रदेश नेतृत्व में नाराजगी फैल गई।

ठाणे जिले के अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोला जिले के अकोट में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ गठबंधन के चलते भाजपा नेताओं को नगर पालिका परिषद का अध्यक्ष चुना गया है।

इस असहज स्थिति पर कांग्रेस ने बुधवार को अंबरनाथ नगर पालिका परिषद के अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया।

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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने अकोट के विधायक प्रकाश भरसखाले को कारण बताओ नोटिस जारी कर उन पर ‘पार्टी की विचारधारा को कमजोर करने और पार्टी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने’ का आरोप लगाया है।

नोटिस में कहा गया, ‘‘अकोट नगर पालिका परिषद चुनाव-2025 में आपने अकोट नगर पालिका परिषद में एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया, जिससे भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा और नीति को ठेस पहुंची। इसके अलावा, ऐसा करते समय आपने किसी को भी विश्वास में नहीं लिया, और इस कृत्य से आपने पार्टी की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है।’’

नोटिस में कहा गया, ‘‘आपको निर्देश दिया जाता है कि आप तुरंत स्पष्टीकरण दें कि आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।’’

वैचारिक प्रतिद्वंद्वियों से गठबंधन पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस तरह की व्यवस्थाओं को भाजपा नेतृत्व द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया था और यह अनुशासन का उल्लंघन है।

महायुति में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने इस घटनाक्रम को ‘गठबंधन धर्म’ के प्रति विश्वासघात बताया, क्योंकि अंबरनाथ में की गई व्यवस्था का उद्देश्य एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी को स्थानीय निकाय की बागडोर संभालने से रोकना था।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) ने कहा कि ये व्यवस्था भाजपा के दोहरे मापदंड और सत्ता हथियाने के लिए किसी भी हद तक जाने की उसकी तत्परता को दर्शाती है।

भाजपा ने 20 दिसंबर को हुए स्थानीय चुनावों के बाद अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ ‘अंबरनाथ विकास आघाडी’ (एवीए) के बैनर तले गठबंधन करके अंबरनाथ नगर पालिका परिषद का नेतृत्व संभाला और सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली) को दरकिनार कर दिया।

भाजपा ने अकोला जिले की अकोट नगर पालिका परिषद में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और अन्य पार्टियों के साथ इसी तरह का गठबंधन किया।

60 सदस्यीय स्थानीय निकाय में एवीए ने 31 सीट के साथ बहुमत हासिल किया। हाल के चुनावों में शिवसेना ने 27 सीट जीती, जो बहुमत से मात्र चार कम थीं। भाजपा ने 14 सीट, कांग्रेस ने 12, एनसीपी ने चार सीट जीतीं, जबकि दो निर्दलीय भी निर्वाचित हुए। एक निर्दलीय के समर्थन से तीन दलों के गठबंधन की ताकत बढ़कर 32 पार्षद तक पहुंच गई, जो बहुमत के लिए जुरूरी 30 के आंकड़े से अधिक थी।

भाजपा पार्षद तेजश्री करंजुले पाटिल ने शिवसेना की मनीषा वालेकर को हराकर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष का चुनाव जीता और बुधवार को शपथ ली।

हालांकि, स्थानीय स्तर पर लिया गया यह निर्णय किसी भी संबंधित पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को रास नहीं आया। कांग्रेस ने अंबरनाथ में नवनिर्वाचित 12 पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि स्थानीय निकाय में भाजपा के साथ गठबंधन का निर्णय पार्टी के राज्य नेतृत्व को सूचित किए बिना लिया गया था।

कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, ‘‘कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है और यह गठबंधन बिना अनुमति के किया गया है।’’

एक समाचार चैनल से बात करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ऐसे गठबंधन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होंगे और स्थानीय नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ कोई भी गठबंधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी स्थानीय नेता ने ऐसा निर्णय अपनी मर्जी से लिया है, तो यह अनुशासनहीनता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’’ उन्होंने आगे कहा कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने कहा, ‘‘अकोट और अंबरनाथ में जो हुआ, उससे भाजपा का गैरजिम्मेदाराना रवैया साफ झलकता है। सत्ता हथियाने के लिए पार्टी किसी से भी गठबंधन कर सकती है।’’

भाजपा, राकांपा और शिवसेना सत्ताधारी महायुति गठबंधन में सहयोगी हैं। शिवसेना ने इन गठबंधनों को ‘अनैतिक और अवसरवादी’ बताया है।

शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इसे ‘गठबंधन धर्म’ के प्रति विश्वासघात और भाजपा के ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ के राष्ट्रीय नारे के विपरीत बताया।

वहीं भाजपा पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल ने मीडिया को बताया कि यह गठबंधन अंबरनाथ को ‘भ्रष्टाचार और धमकियों’ से मुक्त कराने के लिए किया गया है।

एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, “जिन पार्टियों के खिलाफ हम चुनाव लड़ते हैं, उनसे हाथ मिलाना ठीक नहीं है। अगर कुछ लोग सिर्फ सत्ता पाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो वरिष्ठ नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “जिन लोगों के खिलाफ एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी, उन्हीं से हाथ मिलाना स्वार्थ वाला कदम है। कुछ लोगों को समझना चाहिए कि सत्ता ही सब कुछ नहीं होती।”

अकोट में भाजपा ने ‘अकोट विकास मंच’ बनाया, जिसमें एआईएमआईएम के अलावा उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा), शिवसेना, राकांपा, शरद पवार की राकांपा (एसपी) और बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी शामिल हैं।

भाजपा ने 35 सदस्यीय नगर पालिका परिषद में 11 सीट जीतीं, एआईएमआईएम को दो सीट पर जीत मिली जबकि दो सीट पर चुनाव लंबित है। अन्य पार्टियों के समर्थन से गठबंधन के सदस्यों की संख्या बढ़कर 25 हो गई।

भाजपा की माया धुले ने एआईएमआईएम के फिरोजबी सिकंदर राणा को हराकर अकोट नगर पालिका परिषद अध्यक्ष का चुनाव जीता। भाजपा के रवि ठाकुर को समूह का नेता नियुक्त किया गया। कांग्रेस छह सीट के साथ और वंचित बहुजन आघाडी दो सीट के साथ विपक्ष में बनी रहीं।

भाजपा के अकोला सांसद अनूप धोत्रे ने दावा किया कि एआईएमआईएम के चार पार्षदों ने पार्टी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए। एआईएमआईएम के नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा, ‘‘हमारा राजनीतिक रुख भाजपा के खिलाफ है।’’

उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी भाजपा के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी।

राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने बुधवार को जोर देकर कहा कि महायुति गठबंधन के घटक दल कुछ क्षेत्रों में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव अलग-अलग लड़ रहे हैं, लेकिन उनके बीच राजनीतिक मर्यादा बनाए रखने और एक-दूसरे के खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगाने से परहेज करने को लेकर सहमति बनी है।

ठाणे में एक चुनावी रैली के बाद पत्रकारों से बात करते हुए तटकरे ने खुलासा किया कि उन्होंने महायुति सहयोगियों के बीच हालिया कलह को दूर करने के लिए राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ उच्च स्तरीय चर्चा की थी।

भाषा संतोष वैभव

वैभव


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