महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने बांधों से गाद निकालने की संशोधित नीति को मंजूरी दी

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महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने बांधों से गाद निकालने की संशोधित नीति को मंजूरी दी

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  • Publish Date - May 14, 2026 / 05:57 PM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 05:57 PM IST

मुंबई, 14 मई (भाषा) महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल ने सिंचाई के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले जलाशयों से गाद हटाने की संशोधित नीति सहित कई प्रस्तावों पर बृहस्पतिवार को मुहर लगा दी, जिसका उद्देश्य उनकी जल भंडारण क्षमता को बढ़ाना और किसानों को उपजाऊ गाद उपलब्ध कराना है।

अधिकारियों ने बताया कि ऐसे छह बांधों को प्रायोगिक आधार पर शुरू किया जाएगा।

राज्य सरकार ने कहा कि इस कदम से जलाशयों की जल भंडारण क्षमता को बढ़ाने, बांधों का संरक्षण करने और किसानों को अपने खेतों में उपयोग के लिए पोषक तत्वों से भरपूर गाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया गया कि आरक्षित श्रेणियों के वे उम्मीदवार जिन्होंने आयु, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव या परीक्षा में प्रयासों की संख्या में छूट का लाभ उठाया है, उन्हें अब से केवल आरक्षित कोटे के पदों पर ही नियुक्त किया जाएगा और वे खुली श्रेणी के पदों पर नियुक्ति का दावा करने के पात्र नहीं होंगे।

मंत्रिमंडल ने साथ ही मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के लिए एक संशोधित संगठनात्मक संरचना को मंजूरी दी और विभाग की जमीनी स्तर की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए 2,284 अतिरिक्त पदों सहित 8,767 पदों को स्वीकृत किया।

अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिमंडल ने सिंधुदुर्ग जिले और रत्नागिरी जिले में बेहतर योजना और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से व्यापक विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘सिंधुरत्न समृद्धि योजना 2.0’ की मियाद और तीन साल बढ़ा दी है।

मंत्रिमंडल ने नासिक परिक्रमा मार्ग परियोजना के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण को स्टांप शुल्क से छूट देने को मंजूरी दी।

मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966 में संशोधन के तहत चिकित्सा संस्थानों के भवनों के लिए विकास शुल्क में रियायत को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का निर्णय लिया।

एक अन्य निर्णय में, सरकार ने संतरे के आयात शुल्क प्रतिपूर्ति योजना को रद्द कर दिया, जिसके तहत बांग्लादेश को निर्यात करने वाले निर्यातकों को आयात शुल्क पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती थी।

भाषा धीरज नरेश

नरेश