(के जे एम वर्मा)
बीजिंग, 14 मई (भाषा) चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बृहस्पतिवार को अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता के पहले दौर के बाद कहा कि चीन और अमेरिका रचनात्मक द्विपक्षीय संबंधों के निर्माण के लिए एक ‘‘नए दृष्टिकोण’’ पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने आगाह किया कि ताइवान को लेकर तनाव संबंधों को खतरे में डाल सकता है और संघर्षों को जन्म दे सकता है।
बीजिंग में हुई बैठक के बाद चिनफिंग ने कहा, ‘‘मैंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंधों के निर्माण के एक नए दृष्टिकोण पर सहमति व्यक्त की है।’’
सरकारी मीडिया के अनुसार, चिनफिंग ने कहा कि यह ‘‘नया दृष्टिकोण’’ अगले तीन वर्षों और उससे आगे द्विपक्षीय संबंधों के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा तथा दोनों देशों के लोगों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चिनफिंग ने कहा कि अगर स्थिति को सही ढंग से संभाला गया तो द्विपक्षीय संबंध ‘‘कुल मिलाकर स्थिर रहेंगे’’, अन्यथा, दोनों देशों को ‘‘टकराव और यहां तक कि संघर्ष’’ का सामना करना पड़ सकता है, जिससे द्विपक्षीय संबंध गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे।
उन्होंने अमेरिका से ताइवान मुद्दे को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का आग्रह किया।
चिनफिंग ने कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखना बीजिंग और वाशिंगटन के बीच स्थिर संबंधों के लिए प्रमुख महत्व रखता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘‘ताइवान की स्वतंत्रता’’ के लिए समर्थन जलडमरूमध्य में शांति की बात से मेल नहीं खाता।
स्वशासित ताइवान को चीन एक विद्रोही प्रांत मानता है। वह उन देशों को ताइपे के साथ औपचारिक संबंध रखने से रोकता है जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध हैं।
वर्ष 1979 में आधुनिक चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद से, अमेरिका ताइवान को अनौपचारिक समर्थन देते हुए और उसे हथियार मुहैया कराते हुए बीजिंग की मांगों के दायरे में रहने में कामयाब रहा है। वाशिंगटन ताइवान को चीन का हिस्सा मानने के बीजिंग के रुख को स्वीकार करता है, लेकिन स्पष्ट रूप से इसका समर्थन नहीं करता।
चिनफिंग ने कहा कि ‘‘रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता’’ सहयोग, प्रबंधनीय प्रतिस्पर्धा और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह ढांचा महज एक नारा बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि दोनों पक्षों द्वारा ठोस कार्रवाई में तब्दील होना चाहिए।
चिनफिंग ने कहा, ‘‘जहां असहमति और टकराव मौजूद हैं, वहां समान स्तर पर परामर्श ही एकमात्र सही विकल्प है।’’
यह नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा है। इससे पहले ट्रंप ने ही अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2017 में चीन की यात्रा की थी।
ट्रंप बुधवार को व्यापारिक नेताओं के एक समूह के साथ बीजिंग पहुंचे। उनके साथ अमेरिका के कई बड़े कारोबारी नेता भी आए हैं, जिनमें एनवीडिया के जेन्सन हुआंग, एप्पल के टिम कुक, टेस्ला और स्पेसएक्स के एलन मस्क और ब्लैक रॉक के लैरी फिंक सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।
व्यापार वार्ता पर चिनफिंग ने कहा कि दोनों पक्षों की आर्थिक और व्यापार टीमों ने ‘‘आम तौर पर संतुलित और सकारात्मक परिणाम’’ दिए हैं।
यह उल्लेख करते हुए कि चीन अपने दरवाजे व्यापक रूप से खोलेगा, चिनफिंग ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां लंबे समय से देश के आर्थिक सुधारों में शामिल रही हैं और अमेरिका का पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग का विस्तार करने के लिए स्वागत है।
चिनफिंग ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों को उस महत्वपूर्ण सहमति को लागू करना चाहिए जिस पर हम पहुंचे हैं, और राजनीतिक, राजनयिक तथा सैन्य-से-सैन्य क्षेत्रों में संचार चैनलों का बेहतर उपयोग करना चाहिए।’’
चीनी नेता ने कहा कि दोनों देशों को अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, लोगों के बीच संबंधों और कानून प्रवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी आदान-प्रदान तथा सहयोग का विस्तार करना चाहिए।
इससे पहले, ट्रंप ने शी चिनफिंग के साथ अपनी बातचीत को ‘‘शायद अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन’’ बताया, क्योंकि दोनों नेताओं ने ईरान युद्ध, व्यापार तनाव, टैरिफ, प्रौद्योगिकी और ताइवान पर चर्चा की।
चिनफिंग को ‘‘महान नेता’’ बताते हुए ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों का ‘‘एक साथ शानदार भविष्य होगा’’, जबकि चिनफिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी होने के बजाय साझेदार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘‘व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता’’।
ट्रंप की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया संघर्ष और उसके बाद पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण आर्थिक एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं, जिसका असर खासकर एशिया पर पड़ा है।
इस शिखर बैठक में दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या इससे अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी खत्म करने की दिशा में कोई ठोस परिणाम निकलता है या नहीं ?
भाषा
नेत्रपाल मनीषा
मनीषा