महाराष्ट्र निकाय चुनाव में निर्विरोध जीत: कांग्रेस की नोटा की मांग, मनसे नेता ने अदालत का रुख किया

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में निर्विरोध जीत: कांग्रेस की नोटा की मांग, मनसे नेता ने अदालत का रुख किया

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में निर्विरोध जीत: कांग्रेस की नोटा की मांग, मनसे नेता ने अदालत का रुख किया
Modified Date: January 5, 2026 / 10:07 pm IST
Published Date: January 5, 2026 10:07 pm IST

मुंबई, पांच जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों से पहले महायुति उम्मीदवारों की ‘निर्विरोध’ जीत को लेकर विवाद सोमवार को मुंबई उच्च न्यायालय पहुंच गया, जहां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के एक नेता ने 68 सीटों पर परिणामों की घोषणा पर रोक लगाने और ‘‘दबाव में सामूहिक रूप से नाम वापस लेने की’’ अदालत की निगरानी में जांच का आग्रह किया।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ठाणे इकाई के प्रमुख अविनाश जाधव ने आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को भ्रष्ट तरीकों से अपने नामांकन पत्र वापस लेने के लिए मजबूर किया गया या उन्हें, डराया-धमकाया या प्रलोभन दिया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 243-जेडए के तहत ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ होने के प्रावधान का उल्लंघन करता है।

वकील असीम सरोडे के माध्यम से दायर एक याचिका में, जाधव ने ‘सामूहिक रूप से नाम वापस लेने’ की अदालत की निगरानी में जांच और उन 68 सीटों पर परिणामों की घोषणा पर रोक लगाने की मांग की, जहां सत्तारूढ़ भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने निर्विरोध जीत का दावा किया है।

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याचिका पर उचित समय पर सुनवाई की जाएगी। राज्य में 15 जनवरी को 29 नगर निकायों के लिए चुनाव होने हैं।

इससे एक दिन पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य निर्वाचन आयोग से 68 नगर निकाय वार्डों के नतीजे रद्द करने की अपील की, जहां निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति के उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित किया गया।

उद्धव ठाकरे ने कहा कि निर्विरोध जीत ‘जेनरेशन जेड’ और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को उनके मतदान के अधिकार से वंचित कर देती है।

मुंबई नगर निगम चुनावों के लिए अपने संयुक्त घोषणापत्र को जारी करने के लिए मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ मंच साझा करते हुए, उद्धव ने चेतावनी दी कि लोकतंत्र को ‘भीड़तंत्र’ द्वारा कुचला नहीं जाना चाहिए।

उद्धव पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष पर चुनाव में आसन्न हार को देखते हुए ‘बहाने ढूंढने’ का आरोप लगाया।

फड़नवीस ने कहा, ‘वे बेशक अदालत जा सकते हैं, लेकिन जनता की अदालत ने हमें चुना है। भले ही वे (विपक्षी दल) अदालत में जाएं, जनादेश अदालत में सर्वोपरि होगा।’

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मांग की है कि मतदाताओं को उन नगर निकाय वार्डों में भी ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (नोटा) का विकल्प चुनने की अनुमति दी जाए जहां उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित होते हैं, ताकि नागरिक अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर सकें।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति की सत्ता की लालसा लोकतंत्र को निगलने की हद तक पहुंच गई है। देवेंद्र फडणवीस सरकार नगर निकाय चुनावों में निर्विरोध जीत हासिल करने के लिए दबाव, धमकियों और धनबल का इस्तेमाल करके लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।’

सपकाल ने आरोप लगाया कि मतदान से पहले ही ‘खुलेआम पैसों का खेल’ चल रहा है, और निर्विरोध जीतने के लिए, सत्ताधारी दलों के नेता पुलिस और प्रशासन की मदद से विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से भी रोक रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘इस तरह की घटनाओं के दौरान निर्वाचन आयोग मूक दर्शक बना हुआ है।’

महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सोमवार को कहा कि निकाय चुनावों में निर्विरोध जीत “लोकतंत्र के लिए अच्छी बात” है और विपक्षी दल यदि चाहें तो न्याय के लिए अदालत का रुख कर सकते हैं।

भाजपा नेता ने संवाददाताओं से कहा कि ऐसा कोई लिखित नियम नहीं है कि निर्विरोध चुनाव नहीं हो सकते और निर्वाचन आयोग इसकी अनुमति देता है।

राज्य के राजस्व मंत्री ने कहा, “अगर कहीं चुनाव निर्विरोध हो रहे हैं, तो यह एक अच्छी परंपरा है। निर्विरोध जीतने वालों का एजेंडा विकास होता है।”

उन्होंने कहा कि अतीत में कई ऐसे उदाहरण रहे हैं, जब स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों में उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।

भाषा

नोमान वैभव

वैभव


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